गौरीगंज (अमेठी)। असली महिला सशक्तिकरण शिक्षा व रोजगार से आता है। समूह की महिलाएं अब तक अचार, मुरब्बा आदि बना रही थीं। अब उन्होंने सेनेटरी नैपकिन जैसे उत्पादों को तैयार कर रोजगार की दिशा में काम शुरू किया है। यह समूह अन्य समूह की महिलाओं के लिए मिसाल बनेगा।
सीडीओ डॉ. अंकुर लाठर इन दिनों जिले में सुस्त पड़े महिला स्वयं सहायता समूहों को सक्रिय करने में जुटी हैं। मंगलवार शाम सीडीओ मुसाफिरखाना के भनौली गांव में विश्वास महिला ब्लॉक संगठन समूह की ओर से आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुईं। इस समूह की महिलाएं नाबार्ड से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद सेनेटरी नैपकिन बनाने का काम कर रही हैं।
सीडीओ को जानकारी मिली कि इस समूह की महिलाएं अचार, मुरब्बा व पापड़ आदि से हटकर महिलाओं के जरूरत की सामग्री तैयार कर रही हैं। इस पर उन्होंने समूह अध्यक्ष को बुलाकर उनसे जानकारी की। इसके बाद सीडीओ ने नाबार्ड के अफसरों को बुलाकर समूह की महिलाओं की मदद करने को कहा। सीडीओ की पहल पर नाबार्ड के अफसरों ने समूह को नैपकिन बनाने की मशीन के साथ ही अन्य संसाधन मुहैया कराया।
सीडीओ ने कहा कि सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई कार्यक्रम संचालित करा रही है। नाबार्ड प्रशिक्षण के साथ ही ऋण भी मुहैया करा रहा है। कहा कि महिलाओं में झिझक के बावजूद उन्हें सेनेटरी नैपकिन की जरूरत है। उन्होंने विश्वास समूह से अन्य समूह की महिलाओं को सीख लेने को कहा।
मुसाफिरखाना में इस कार्यक्रम में महिलाओं के स्वास्थ्य पर बोलते हुए डॉ. स्वाति शुक्ला ने कहा कि माहवारी के दौरान महिलाओं में संक्रमण का खतरा होता है। इसलिए उन्हें आम कपड़ों की जगह सेनेटरी नैपकिन का प्रयोग करने की आदत डालनी चाहिए। इस मौके पर नाबार्ड के डीडीएम अशोक तिवारी व एसके यादव मौजूद रहे।