अमेठी। भगवान की शरण में जाने से ही कल्याण संभव है। भगवान की कथा का गुणगान ही भजन है। टीकरमाफी स्थित श्रीमद् स्वामी परमहंस आश्रम परिसर में प्राण प्रतिष्ठा वार्षिकोत्सव महोत्सव के तहत आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन डॉ. श्याम सुंदर पाराशर महाराज ने यह संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि ऐसे किसी को चित्त में नहीं बैठाना चाहिए, जिसके आने और जाने से दुख हो। चित्त के प्रभाव से बाहर निकलना बहुत मुश्किल होता है। संसार में रहो लेकिन संसार को अपने चित्त में नहीं बसाओ। इस अखिल ब्रह्माण्ड में जो दिख रहा है वह सब परब्रह्म परमेश्वर का है। सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में परम पिता परमेश्वर का दर्शन करना चाहिए।
कथा के पूर्व आश्रम परमाध्यक्ष स्वामी हरिचैतन्य ब्रह्मचारी, प्रधान संरक्षक अवधेश नारायण पांडेय, हर्ष चैतन्य ब्रह्मचारी ने दीप प्रज्ज्वलित कर व व्यास पीठ का पूजन व आरती की। इस मौके पर राज बहादुर सिंह चौहान, स्वामी प्रसाद त्रिपाठी, आचार्य धर्मेंद्र, शिवाकांत शास्त्री, अतुल त्रिपाठी, सत्य प्रकाश, वीरेंद्र सिंह, संतोष सिंह आदि मौजूद रहे।
शतचंडी महायज्ञ आज से
टीकर माफी आश्रम में नवरात्र के पहले दिन मंगलवार से शतचंडी महायज्ञ का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विद्वान करेंगे। समिति के प्रधान संरक्षक अवधेश नारायण पांडेय ने बताया कि शतचंडी महायज्ञ को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।