.गायत्री शक्तिपीठ अमेठी में जप अनुष्ठान करते साधक। स्रोत- आयोजक
अमेठी। गायत्री शक्तिपीठ में गायत्री महापुरश्चरण साधना के 27वें दिन मंगलवार को पूजन-अर्चन हुआ। साधक राणा प्रताप सिंह ने आत्मसाधना और आत्मचेतना के महत्व पर विचार रखे।
उन्होंने कहा कि आत्मसाधना जीवन को सही दिशा देने वाला व्यावहारिक मार्ग है। आत्मचेतना जागृत होने पर विचार और कर्म पवित्र होने लगते हैं। आत्मा सत्यस्वरूप, ज्ञानमय और अनंत है। शरीर और मन उसके साधन हैं। ध्यान, साधना और अंतर्मुखता से आत्मचेतना का अनुभव किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि आत्मा जीवन को दिशा देने वाली ज्योति है, जो मनुष्य को पशुता से ऊपर उठाकर दिव्यता की ओर ले जाती है। साधना के माध्यम से व्यक्ति में सद्गुणों का विकास और सकारात्मक सोच मजबूत होती है। इस मौके पर सुभाष चंद्र द्विवेदी, अनिल पांडेय, जितेंद्र सिंह, सुनीता सिंह, शीला, कविता, सुधा और संगीता आदि मौजूद रहे।