संग्रामपुर (अमेठी)। डिजिटल इंडिया बन रहे देश को आजाद हुए भले ही सात दशक बीत चुके हैं, पर कुछ कई ग्रामीण क्षेत्र ऐसे हैं, जहां आज भी विकास नहीं पहुंच सका है। ऐसे में जब परेशान ग्रामीणों की किसी ने नहीं सुनी तो गांव के 100 से अधिक लोगों ने गुरुवार को प्रदर्शन करते हुए श्रमदान से 12 सौ मीटर सड़क का निर्माण खुद ही शुरू कर दिया। इसके लिए चंदा जुटाया, 25 ट्राली ईंट-अध्धे मंगाए और खड़ंजा बनाने में जुट गए। गुरुवार शाम तक लगभग 300 मीटर तक निर्माण पूरा हो चुका था, आगे भी श्रमदान चलेगा।
संग्रामपुर की ग्राम पंचायत करनाई के शिवपुर व प्रतापनगर गांव तक कोई संपर्क मार्ग नहीं है। ग्रामीण लंबे समय से गांव तक पक्का मार्ग बनवाए जाने की मांग कर रहे हैं। लंबे समय से मांग पूरी नहीं होने के बाद पिछले दिनों गांव के लोगों ने आपसी सहयोग से लगभग 85 हजार का चंदा जुटाया। बृहस्पतिवार को ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन के बाद सुबह 10 बजे से चंदे से मंगाई गई 25 ट्राली ईंट और अध्धे को कच्ची पगडंडी पर बिछाना शुरू कर दिया।
ग्रामीणों के मुताबिक इस गांव की दूरी ब्लॉक मुख्यालय से महज पांच किलोमीटर दूर है। गांव में आज भी एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती। बीमार पड़ने पर लोग पीड़ित को चारपाई पर लादकर गांव के बाहर तक ले जाते हैं। दोनों गांव के लोग बड़ी संख्या में खेती करते हैं। अपनी सब्जियों को मंडी पहुंचाने में भी किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीण घनश्याम शर्मा, दारा सिंह, दिलावर सिंह, दूधनाथ वर्मा, सरदार सिंह, प्रभावती, पन्ना देवी, विक्रमाजीत वर्मा, बाबू लाल सिंह, हरिहर, राम बहादुर वर्मा सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने बताया कि लगातार स्थानीय जन प्रतिनिधियों, विधायक व सांसद से गुहार लगाई गई। बावजूद इसके सड़क नहीं बनाई गई। बारिश में कच्ची सड़क जर्जर हो जाने से आवागमन बाधित हो जाता है।
बताया कि चुनाव के समय नेताओं के द्वारा सड़क बनाने का आश्वासन दिया जाता है। लेकिन चुनावों के बाद कोई भी नेता गांव की तरफ नहीं देखता। बच्चों को स्कूल ले जाने के लिए गांव में कोई वाहन नहीं आ पाता। गांव से डेढ़ किलोमीटर दूर रोड तक पैदल आना पड़ता है। रास्ता न होने के कारण गांव के शादी विवाह भी सिर्फ गर्मी के मौसम में ही हो पाते हैं।