मुसाफिरखाना (अमेठी)। मनरेगा योजना के तहत ब्लॉक द्वारा किए जा रहे भुगतान में देरी और रुकावट पर कई प्रधान नाराज हो गए। इन ग्राम प्रधानों ने ब्लाॅक कार्यालय में ताला जड़ दिया। करीब एक घंटे तक एडीओ पंचायत सहित ब्लॉक कर्मी बंद रहे। मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थिति संभाली। बीडीओ बंधक बनाए जाने की बात से इन्कार कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब वह पहुंचे तो ऐसी स्थिति नहीं थी। जबकि, पुलिस का दावा है कि ग्राम प्रधान ब्लॉक कार्यालय में ताला लगाने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन सफल नहीं होने दिया गया।
मुसाफिरखाना ब्लॉक क्षेत्र की 56 ग्राम पंचायतों में मनरेगा योजना से विकास कार्य करवाने के बाद ग्राम प्रधान भुगतान की राह देख रहे थे। शासन से मनरेगा योजना के तहत कराए गए कार्याें के भुगतान के लिए कुल एक करोड़ साठ लाख रुपये आवंटित हुआ। शनिवार को आवंटित धनराशि आधी-अधूरी होने से ग्राम प्रधान ब्लॉक में जमा होकर भुगतान करवाने की कोशिश में जुटे थे। हालांकि, शुक्रवार को भी ग्राम प्रधान आए, लेकिन भुगतान नहीं हुआ। जबकि इसके लिए लगभग 20 मिनट समय निर्धारित था। शनिवार को दोबारा ग्राम प्रधान जुटे। लेकिन निर्धारित मिले समय में धनराशि का भुगतान नहीं हो सका। इसी बात पर ग्राम प्रधान भड़क गए।
ग्राम प्रधानों ने पंचायत कर्मियों पर आरोप लगा कर विरोध शुरू कर दिया। कुछ कर्मी वहां से भाग निकले, लेकिन एडीओ पंचायत सहित कई कर्मियाें को ब्लॉक कार्यालय भवन में ग्राम प्रधानों ने बंधक बनाकर गेट पर ताला लगा दिया। एक घंटे तक ब्लॉक कर्मी बंद रहे। सूचना सार्वजनिक हुई तो पंचायत व पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। पुलिस ने बंद ताला खोलवाया। इसके बाद कर्मी बाहर आए।
किसी तरह का कोई विवाद नहीं था
बीडीओ बृजेश ने बताया कि बंधक बनाने का मामला गलत है। सूचना के बाद जब वह ब्लॉक पहुंचे तो मामला शांत था। किसी तरह कोई विवाद नहीं था। नियमानुसार भुगतान किया जा रहा है।
मौके पर पहुंची थी पुलिस
एसएचओ विवेक सिंह ने बताया कि भुगतान को लेकर ग्राम प्रधानों व कर्मियों के बीच विवाद की सूचना पर फोर्स मौके पर गई थी। फोर्स पहुंची तो ग्राम प्रधान ताला बंद करने की कोशिश में जुटे थे। उनकी कोशिश सफल नहीं होने दी गई। तहरीर मिलती है तो केस दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।