जायस (अमेठी)। राजीव गांधी पेट्रोलियम प्रौद्योगिकी संस्थान में सतत विकास के लिए नेट जीरो एवं ऊर्जा संक्रमण विषय पर आयोजित संगोष्ठी का रविवार को समापन हुआ। इसमें वक्ताओं ने कृषि अपशिष्ट जलाने के बजाय जैव ईंधन के तौर पर प्रयोग करने की सलाह दी।
संगोष्ठी में दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. अनुभव गर्ग ने हाइड्रोजन के भविष्य ईंधन की संभावना विषय पर अपना शोध कार्य प्रस्तुत किया। कहा कि वर्ष 2070 तक सरकार ने भारत को नेट जीरो राष्ट्र विकसित करने का लक्ष्य रखा है। उसमें हाइड्रोजन की बहुत बड़ी भूमिका होगी। भारत सरकार ने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन की स्थापना की है। जिस पर लगभग 19,000 करोड़ रुपये खर्च किये जाने की योजना है।
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की रेनु सिंह ने कृषि अपशिष्ट से जैव इंधन- सतत विकास के लिए संभावनाएं विषय पर अपना शोध कार्य प्रस्तुत किया। कहा कि किसानों को अपने कृषि अपशिष्ट को जलाने के बजाय उसका उपयोग जैव ईंधन उत्पादन के रूप में करना चाहिए। इससे पर्यावरण को स्वच्छ रखने में मदद मिलेगी, वहीं दूसरी ओर जैव ईंधन का उत्पादन कर हम अपनी ऊर्जा जरूरत की पूर्ति भी कर सकते हैं।
देश-विदेश के 147 शोधार्थियों, प्राध्यापकों एवं उद्योग जगत के विशेषज्ञों ने प्रतिभाग कर अपना शोध कार्य प्रस्तुत किया। इनमें से कुछ प्रतिभागी आस्ट्रेलिया, मस्कट, सउदी अरब एवं मोरक्को से प्रतिभाग कराने आए थे। अलग-अलग सत्रों की अध्यक्षता डॉ. जया श्रीवास्तव विभागाध्यक्ष व कार्यक्रम- समन्वयक, डॉ. रोहित बंसल कार्यक्रम सह-समन्वयक, डॉ. देबाशीष जेना सहायक प्राध्यापक एवं डॉ. सरोज मिश्रा ने की।