अमेठी। पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर सुर्खियों में आए निलंबित सिपाही सुनील शुक्ल सोमवार को अपने पैतृक गांव मेदनमवई पहुंचे। गांव पहुंचते ही उन्होंने फिर विभागीय व्यवस्था पर सवाल उठाए और कहा कि लगातार शिकायतों के बाद भी सुनवाई नहीं हुई।
मुख्यमंत्री तक सीधे शिकायत न पहुंचा पाना उनकी गलती रही, जिसका कारण अफसरों का डर और विभागीय अनुशासन था। इसलिए उन्हें सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखनी पड़ी। सुनील शुक्ल ने आरोप लगाया कि अब उन पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।
मुंशीगंज के रामसेवक मिश्र का पुरवा मेदनमवई गांव निवासी सुनील शुक्ल निलंबन के बाद पहली बार गांव पहुंचे। उन्होंने कहा कि विभाग में ड्यूटी लगाने, अवकाश स्वीकृत कराने और विभिन्न बिल पास कराने तक में कर्मचारियों को परेशान होना पड़ता है।
उनका दावा है कि कई बार अधिकारियों तक लिखित शिकायतें पहुंचाई गईं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने बताया कि रायबरेली में पत्नी को आवंटित सरकारी आवास की जर्जर हालत की शिकायत भी कई बार की गई, मगर समस्या का समाधान नहीं हुआ।
उनका कहना था कि विभागीय स्तर पर सुनवाई न होने के बाद उन्होंने वीडियो के माध्यम से अपनी बात सार्वजनिक की। सुनील शुक्ल ने आरोप लगाया कि अब उन पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। मुख्यमंत्री से न्याय की उम्मीद जताते हुए उन्होंने कहा कि सच बोलने की लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।