अमेठी। सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्या ने कहा कि सोने की चिड़िया कहे जाने वाले भारत को धर्म के ठेकेदारों ने गरीब और लाचार बना दिया है। विफलताओं को छिपाने के लिए धर्म और राम के नाम का ढिंढोरा पीट रहे हैं। यह बातें रविवार को बाजार शुकुल में आयोजित संविधान संगोष्ठी एवं सामाजिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बतौर मुख्य अतिथि सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने कही।भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि अयोध्या में हजारों वर्षों से राम पूजा जा रहे है। भाजपा उनकी मार्केटिंग कर रही है। अपरोक्ष रूप से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा कर साबित करना चाहते हैं कि वह उनसे बड़े हैं।
कार्यक्रम को नीरज पटेल, सुल्तानपुर के पूर्व जिलाधिकारी आर ए प्रसाद, राम कृपाल सरोज ,प्यारेलाल रावत, पूर्व सांसद ताहिर खां, श्रीपाल सरोज , शकुन्तला गौतम, जगन्नाथ सरोज, अनिल बौद्ध आदि ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।
रामचरितमानस की चौपाई से सरकार पर साधा निशाना
रामचरितमानस की चौपाई का जिक्र करते हुए सरकार पर निशाना साधा। कहा कि ढोल गंवार शूद्र पशु नारी, सकल ताड़ना के अधिकारी के आधार पर अगर आप लोग नहीं चेते तो आपकी ताड़ना चलती रहेगी। कहा कि आज भी इस लोकतांत्रिक देश में राष्ट्रपति को मंदिरों में जाने से मना कर दिया जाता है।
उन्होंने मीडिया पर गोदी मीडिया होने का आरोप लगाते हुए कहा कि आज युवा बेरोजगार है उनकी नौकरी पर सवाल नहीं होता है। उन्होंने ने सरकार पर ईडी के माध्यम से सिर्फ विपक्षी नेताओं को परेशान का आरोप लगाया। बिहार के मुख्यमंत्री नितिश कुमार पर भी निशाना साधा। कहा कि लोकतांत्रिक देश में लोकतंत्र को निगलने की तैयारी है। उन्होंने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आज भाजपा सरकार पुश्तैनी कार्यों को लेकर छलावा के रूप में जनकल्याणकारी योजना बढ़कर फिर से उन्हें पुराने कार्यों में लगाकर मजलूम करने पर तुली है। कहा कि 80 करोड़ लोगों को सरकार गरीब एवं मजलूम बता कर 5-10 किलो राशन दे रही है। जनता से लोकतंत्र व संविधान के दुश्मनों को भागने और लोकतंत्र तथा संविधान को बचाने की अपील की कहा कि देश बेचने वालों को लोकसभा चुनाव में जवाब देकर भगाना है।
आरोप लगाने वाले ह देंगे जवाब
पत्रकारों से बातचीत में सवाल पूछा गया कि आपकी पार्टी के ही मनोज आपपर मानसिक रूप से विक्षिप्त होने का आरोप लगा रहे हैं। इसपर स्वामी प्रसाद ने कहा कि इसका बेहतर उत्तर वही दे सकते हैं, जिन्होंने इस तरह का आरोप लगाया है। इस देश के दलित, आदिवासियों, पिछड़ों पर जो जुल्म व अत्याचार करना अधिकार मानते हैं, जो हमें जानवर से बदतर जीवन जीने की परिस्थितियां पैदा करते हैं, वह हमारी तारीफ कैसे कर सकते हैं।