गायत्री मंदिर परिसर में आयोजित संकल्प कार्यक्रम में मौजूद श्रद्धालु। स्रोत: आयोजक
अमेठी। गायत्री शक्तिपीठ में आयोजित प्रज्ञा पुराण कथा और गायत्री महायज्ञ का रविवार शाम दीपोत्सव के साथ समापन हुआ। क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने हजारों दीप जलाकर पूरे परिसर को जगमग कर दिया। बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने उत्साह के साथ दीप जलाकर कर गायत्री दीप महायज्ञ में आहुति देते हुए युग निर्माण का संकल्प लिया।
15 अप्रैल से शुरू हुए आयोजन के अंतिम दिन बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। सुबह आठ बजे प्रारंभ हुआ हवन कार्यक्रम दोपहर बाद तक चला। श्रद्धालुओं ने आहुति दी और भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया। दीपों की रोशनी से पूरा क्षेत्र आलोकित दिखा। अंतिम दिन कथा में आचार्य कैलाश नाथ तिवारी ने मीराबाई का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि सच्ची श्रद्धा और भक्ति से कठिन कार्य संभव होते हैं। श्रद्धालुओं को प्रतिदिन गायत्री मंत्र जप, साहित्य अध्ययन और युग निर्माण के कार्यों में भागीदारी का संकल्प दिलाया गया।
गायत्री मंत्र की आहूतियों के साथ महायज्ञ की पूर्णाहुति हुई। इस दौरान लोगों ने अपनी एक बुराई छोड़ने का संकल्प भी लिया। कार्यक्रम की शुरुआत में युवा प्रभारी डॉ. प्रवीण सिंह दीपक ने स्वागत करते हुए युवाओं से समाज निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। अंत में संयोजक डॉ. त्रिवेणी सिंह ने सहयोगियों, शांतिकुंज हरिद्वार की टोली और क्षेत्र के लोगों के प्रति आभार जताया।