अमेठी। कस्बा स्थित सीएचसी परिसर में बनकर तैयार ट्रॉमा सेंटर का संचालन वैश्विक महामारी कोरोना के दौरान भी नहीं हो सका। यह स्थिति तब है जब अस्पताल भवन का निर्माण कार्य काफी दिनों पहले पूरा हो चुका है। विद्युत कनेक्शन न होने से इसके भवन का हस्तांतरण नहीं हो सका।
लखनऊ-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर होने वाली दुर्घटना में घायल लोगों के साथ जिलेवासियों को इमरजेंसी चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के लिए मौजूदा प्रदेश सरकार ने जगदीशपुर के पुराने सीएचसी परिसर में ट्रॉमा सेंटर के निर्माण को स्वीकृति प्रदान की थी।
केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के प्रयास से वर्ष 2018 में शासन ने भवन निर्माण को मंजूरी प्रदान करते हुए दो करोड़ 23 लाख 78 हजार रुपये की वित्तीय स्वीकृति दी थी। 10 दिसंबर 2018 को मिली प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति तथा एक करोड़ 11 लाख 90 हजार रुपये की पहली किश्त मिलने के बाद कार्यदायी संस्था ने निर्माण शुरू किया।
कार्यदायी संस्था ने भवन के लिए स्वीकृत व दो किश्तों में आवंटित संपूर्ण राशि खर्च होने के बाद धन की कमी बताते हुए दो करोड़ 70 लाख 78 हजार का पुनरीक्षित आगणन भेजकर धन आवंटन की मांग की।
शासन की ओर से पुनरीक्षित आगणन मिलने के बाद कार्यदायी संस्था ने विद्युत कनेक्शन के लिए तीन लाख रुपये का बजट बचाकर शेष धन भवन निर्माण में खर्च कर दिया।
भवन निर्माण पूरा होने के बाद निर्माण इकाई ने जब बिजली कनेक्शन के लिए पावर कार्पोरेशन का दरवाजा खटखटाया तो उसने पांच लाख 35 हजार रुपये का स्टीमेट थमा दिया। लंबे-चौड़े इस स्टीमेट व कोरोना की वजह से लंबे समय तक चला लॉकडाउन ट्रॉमा सेंटर के भवन हस्तांतरण में रोड़ा बन गया।