अमेठी सिटी। भीषण गर्मी के चलते लोग बिजली संयंत्रों पर ज्यादा निर्भर हो गए हैं, जिसका असर है कि जुलाई माह में पड़ रही उमसभरी गर्मी में दिख रहा है। अधिक लोड पड़ने से ट्रांसफार्मर फुंक रहे हैं।
स्थिति यह है कि हर माह ट्रांसफार्मर जलने का ग्राफ 30 से 35 प्रतिशत तक जा रहा है। भीषण गर्मी के साथ ही लोगों को हो रही परेशानी का अंदाजा लगाया जा सकता है। जहां ट्रांसफार्मर जलता है, उसे बदलने में दो से तीन दिन का समय लग जाता है। हालांकि कई बार हफ्ते भर से ज्यादा समय लग जाता है।
ट्रांसफार्मर से उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति नहीं हो पा रही है। लोड के अनुसार, ट्रांसफार्मर की क्षमता कम है, इससे गर्मी के मौसम में आएदिन ट्रांसफार्मर जलने की शिकायत आती रहती है। मांग के बाद भी ट्रांसफार्मर की क्षमता वृद्धि नहीं की जा रही है।
शासन ने शहरी के साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में भी 24 घंटे बिजली आपूर्ति का निर्देश दिया है, लेकिन ओवरलोडिंग के चलते ट्रांसफार्मर जलने की प्रक्रिया तेज है। इसका असर है कि नियमित रूप से सात से 12 ट्रांसफार्मर जलने के मामले देखने को मिल रहे हैं।
वर्कशॉप में ट्रांसफार्मर नियमित रूप से आ रहे हैं, जहां उनकी खराबी को ठीक कर अगली जगह के लिए भेजा जा रहा है। पहले से ठीक कर रखे गए ट्रांसफार्मर को विकल्प के रूप में भेजा जा रहा है। पावर कार्पोरेशन का दावा कि ट्रांसफार्मर गोदाम पहुंचने के बाद तत्काल पहले से सही ट्रांसफार्मर से परिवर्तित कर भेजा जाता है। जबकि हकीकत में खराब ट्रांसफार्मर बदलने में दो से तीन का समय लग रहा है। इस अवधि में उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
स्टॉक में रखे ट्रांसफार्मर से किया जाता है परिवर्तित
गौरीगंज वर्कशॉप के प्रभारी अभियंता गोवर्धन मिश्र ने बताया कि एक ट्रांसफार्मर ठीक करने में पांच से सात दिन का समय लग जाता है। करीब 30 से 40 ट्रांसफार्मर ठीक स्थिति में तैयार रखे हुए हैं, जिसे आपात स्थिति में प्रयोग किया जा सकता है। खराब ट्रांसफार्मर पहुंचने के बाद तत्काल दूसरा ट्रांसफार्मर दिया जाता है।
चार माह में जले कुल ट्रांसफार्मर
माह - संख्या
अप्रैल - 134
मई - 203
जून - 280
जुलाई - 315