अमेठी। इस बार टमाटर की बंपर पैदावार ने किसानों के चेहरे तो खिला दिए थे, लेकिन बाजार भाव ने उनकी उम्मीदें तोड़ दीं। मंडी में टमाटर का थोक मूल्य महज चार से छह रुपये प्रति किलो मिल रहा है, जबकि एक किलो टमाटर की लागत ही 10 से 12 रुपये आ रही है। इससे किसान न तो लागत निकाल पा रहे हैं और न ही मेहनत का मोल मिल रहा है।
अमेठी की मंडी में टमाटर की भरमार है, मगर मांग कम होने और बाहर से ऑर्डर न मिलने की वजह से भाव गिर गए हैं। हालात यह हैं कि कुछ किसान टमाटर तोड़ना ही बंद कर चुके हैं, जबकि कई मजबूरी में फसल को खेत में ही सड़ने के लिए छोड़ दे रहे हैं। डेढ़पसार, तिवारीपुर, सांकार मानापट्टी, बड़गांव, धोएं, शीतलागंज, ठेंगहा, करनाईपुर, अम्मरपुर और गड़ेरी गांवों के किसानों ने इस बार बड़े क्षेत्रफल में टमाटर की खेती की थी।
शुरुआती दिनों में फसल की हालत देखकर किसानों को अच्छे दामों की उम्मीद थी, लेकिन आवक शुरू होते ही मंडी में दाम गिर गए। धोएं निवासी संदीप, रामअधीन, शिव कुमार और मनोज सहित कई किसानों का कहना है कि सरकार को स्थानीय स्तर पर शीतगृह (कोल्ड स्टोरेज) की सुविधा देनी चाहिए, ताकि सब्जियों को कुछ समय तक सुरक्षित रखा जा सके। तापमान बढ़ने से टमाटर तेजी से खराब हो रहे हैं। यदि कोल्ड स्टोरेज होता, तो मंडी के खराब हालात में भी फसल को बचाया जा सकता था।
अमेठी मंडी के आढ़ती जय प्रकाश ने बताया कि अभी मंडी में रोजाना करीब 150 कैरेट टमाटर आ रहा है, जबकि खपत केवल 80 कैरेट के आसपास है। यदि जल्द ही टमाटर की खपत दूसरे राज्यों में शुरू नहीं हुई, तो किसानों को फसल फेंकनी पड़ेगी।