अमेठी। आधा दिसंबर बीत के बाद भी क्षेत्र की नहरों में पानी नहीं है। ऐसे में समय से गेहूं व सरसों की सिंचाई नही हो पा रही है। तेज पछुआ को देखते हुए किसानों को निजी ट्यूबवेल से सिंचाई करनी पड़ रही है। बड़ी संख्या में ऐसे किसान भी हैं जिनके खेतों में नमी चली गई थी जिसके चलते बोआई भी नहीं हो सकी।
शारदा सहायक खंड 41 से निकलने वाली नहर सिंहपुर नहर में पानी नहीं आने से जहां कुछ किसानों की बोआई पिछड़ी है वहीं नवंबर के प्रथम पखवाड़े में बोए गए गेहूं की फसल को सिंचाई का इंतजार है। जब नहर में पानी आने का समय है तो नहर में पानी नहीं है। यह स्थिति तब है जब तकरीबन नहरों में सिल्ट सफाई का कार्य हो चुका है।
सिंहपुर रजबहा सितंबर में बंद हुई थी। तब से लगभग तीन माह बीतने को है। बावजूद इसके नहर में पानी आने के स्थान पर बालू उड़ रही है। किसानों की जमीन नमी न होने के चलते पलेवा के लिए पड़ी है। बोआई नहीं हो पाई है। इसी के साथ नवंबर के प्रथम सप्ताह में गेहूं व सरसों की सिंचाई का समय भी निकल रहा है। जिन किसानों के पास निजी सिंचाई के साधन हैं उनकी सिंचाई तो हो रही लेकिन जिनके पास निजी साधन नहीं है उनकी बोआई से लेकर सिंचाई तक पिछड़ रही है।
किसान रमाकांत मिश्र का कहना है कि बीते कई दिनों से पछुवा चल रही है। ऐसे में खेतों की नमी बहुत तेजी से गायब हो रही है। सिंहपुर रजबहा के अलावा इसमें से निकलने वाली छोटी बड़ी तीन दर्जन माइनरों से हजारों किसानों के खेतों की सिंचाई होती है। सिंहपुर रजबहा में पानी नहीं आने से सभी माइनर सूखी हैं।
कृषि विभाग में कार्यरत वैज्ञानिक डॉ. पवन कुमार वर्मा का कहना है कि बीते कई दिनों से तेज पछुवा बह रही है। इससे सर्दी तो बहुत तेजी से बढ़ी है। साथ ही खेतों की नमी भी उड़ रही है। ऐसे में यदि गेहूं की फसल 20 दिनों से अधिक की हो गई है तो निश्चित ही सिंचाई कर दें। इसका फायदा फसल में कल्लों की बढ़ोत्तरी में देखने को मिलेगा। शारदा सहायक खंड-41 के सिंहपुर रजबहा के सहायक अभियंता जयपाल ने कहा कि सिंहपुर रजबहा में अगले सप्ताह पानी छोड़ा जाएगा।