अमेठी सिटी। गिरते हुए भूजल स्तर को रोकने व उसे संरक्षित करने की पहल शुरू हो गई है। तीन और तालाब को वेटलैंड संरक्षण वन बनाने की तैयारी है। इससे प्रवासी और अप्रवासी पक्षियों के प्रवास के साथ ही संरक्षण प्रदान करके उसे पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित करने की तैयारी है।
वेटलैंड संरक्षण के लिए अमेठी तहसील का बड़ैलाताल, गौरीगंज का सम्हावां और मुसाफिरखाना का नंदौरा तालाब चुना गया है। वेटलैंड का मतलब होता है ऐसी जमीन, जो पूर्ण या आंशिक रूप से पानी से भरा होता है। पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने के लिए वेटलैंड की भूमिका अहम होती है। प्रवासी पक्षियों के रहने के लिहाज से भी यह जगह काफी अनुकूल होती है। जलीय जीव जंतुओं के लिए भी वेटलैंड संरक्षण का काम करते हैं।
जलस्तर को बढ़ाने और जलीय जीवों, पशु व पक्षियों को संरक्षित करने के लिए यह कवायद शुरू की गई है। इन तीनों तालाबों का क्षेत्रफल प्रति तालाब 2.0 हेक्टेयर है। इन जलाशयों को वेटलैंड वन के रूप में संरक्षित किया जाएगा। जलाशयों के पास अधिक से अधिक संख्या में पौधे रोपे जाएंगे। प्रभागीय वनाधिकारी रणवीर मिश्र ने बताया कि वेटलैंड संरक्षण वन को लेकर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
लगेंगे 3200 पौधे
वेटलैंड संरक्षण वन घोषित होने के बाद इस क्षेत्र में 3200 सौ पौधे लगाए जाएंगे। ताकि आसपास रहने वाले जीव-जंतुओं को इनके जरिए संरक्षण मिल सके। क्षेत्र में अर्जुन, जामुन, पीपल, पाकड़, गूलर, बरगद व सागौन आदि के पेड़ लगाए जाएंगे।
प्रस्तावित तालाब के पास इनका है बसेरा
वन विभाग के मुताबिक इस क्षेत्र में स्तनपायी में सियार, लोमड़ी, नेवला, वनरोज, गिलहरी, सेही, खरगोश, चूहा, बंदर, लंगूर, पक्षियों में तीतर, बटेर, मोर, कबूतर, फाख्ता, हरियल, तोता, बगुला, सारस, कोयल, कौआ, किंगफिशर, धनेश, चील, नीलकंठ, गौरैय्या, मैना आदि शामिल हैं। इसके अलावा सरीसृप में शुमार कछुआ, गोह, छिपकली, गिरगिट, अजगर, सांप आदि भी पाए जाते हैं। इसी तरह कई किस्म की मछलियां, उभयचर भी रहते हैं।
यह होगा फायदा
वेटलैंड के आसपास स्थानीय लोग मत्स्य पालन करते हैं। यह उनकी आय का मुख्य स्रोत है। वहीं, वेटलैंंड के पानी से किसान फसलों की सिंचाई करते हैं। साथ ही मवेशियों व वन्य जीवों के लिए पानी उपलब्ध रहेगा। वहीं, इसे पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित किया जाएगा, ताकि ईको पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सके। इससे लोगों को रोजगार मिलेगा। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।
रोजगार भी मिलेगा
जिले के तीन तालाब को वेटलैंड के तौर पर विकसित करने की तैयारी है। इससे भूजल का स्तर सुधरने के साथ ही पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित किया जाएगा। इससे लोगों को रोजगार भी मिलेगा।
- रणवीर मिश्र, डीएफओ अमेठी