तिलोई। तहसील की अदालतों में वादों की सुनवाई न होना आम बात हो गई है। बुधवार और बृहस्पतिवार को हड़ताल के साथ न्यायिक कार्य बाधित रहे। शुक्रवार के बाद शनिवार को भी अधिकारी अपनी कोर्ट में नहीं बैठे, जिसकी वजह से करीब 200 वादकारियों को मायूस होकर लौटना पड़ा।
आंकड़ों के मुताबिक उपजिलाधिकारी के न्यायालय में 46, उपजिलाधिकारी न्यायिक की अदालत में 88, तहसीलदार के यहां 36, तहसीलदार न्यायिक के यहां 47, नायब तहसीलदार उत्तरी के यहां 28, जबकि नायब तहसीलदार दक्षिणी के यहां 39 मुकदमे सुनवाई के लिए नियत थे। मोहना से मुकदमे की पैरवी करने पहुंचे अली बहादुर व जैनुलनिशा का कहना है कि वर्षों से वाद लंबित है लेकिन तारीख ही मिल रही है। मुकदमे में कार्रवाई भी होगी, ऐसा मुश्किल दिख रहा है।
महेशपुर निवासी संतलाल का कहना है कि एक साल से दौड़ लगाने के बाद बस तारीखें ही मिल रही हैं। अब न्याय मिलने की राह मुश्किल दिख रही है। अधिवक्ता संघ के महामंत्री सुरेंद्र कुमार शुक्ला ने बताया कि बृहस्पतिवार को अमेठी के अधिवक्ता साथी के निधन के चलते शोक प्रस्ताव था और शुक्रवार व शनिवार को अधिकारियों के न बैठने से वादों की सुनवाई नहीं हो सकी।
तहसीलदार अभिषेक कुमार यादव ने बताया कि आए दिन अधिवक्ताओं के प्रस्ताव के चलते न्यायिक कार्य बाधित हो रहा है, जिससे वादकारियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बार से सामंजस्य स्थापित कर मुकदमों की सुनवाई की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकारी काम की व्यस्तता के चलते न्यायिक कार्य नहीं हो सका।