अमेठी के भावलपुर में वैष्णो देवी से लौटे श्राद्धलु से जानकारी लेते ग्रामीण। -संवाद
अमेठी। मां वैष्णो देवी के दर्शन के लिए संग्रामपुर के अलग-अलग गांवों से गए 47 श्रद्धालु शनिवार रात सकुशल अपने घर पहुंचे। जम्मू यात्रा के दौरान उनकी आंखों के सामने जो विनाशकारी दृश्य घटा, उसने सभी को भीतर तक हिला दिया। घर लौटने के बाद परिजनों ने राहत की सांस ली, लेकिन श्रद्धालु उस भयावह मंजर को भूल नहीं पा रहे हैं।
श्रद्धालु रविंद्र मिश्र ने बताया कि 25 अगस्त को जत्था बेगमपुरा से जम्मू रवाना हुआ। 26 अगस्त की सुबह जैसे ही सभी कटरा पहुंचे, अचानक मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। नदियां उफान पर थीं और सड़कें बहने लगीं। अफरातफरी के बीच सभी ने हिम्मत जुटाकर अर्धकुंवारी की ओर बढ़ना शुरू किया। तभी जोरदार धमाके के साथ पहाड़ दरका और भारी भूस्खलन हुआ। विशाल पत्थर व मलबा गिरते ही रास्ता बंद हो गया। चारों ओर धूल का गुबार छा गया और लोग चीखने-चिल्लाने लगे।
शत्रुघ्न शर्मा ने बताया कि कुछ ही मिनटों में लोग मलबे में दब गए। उनकी आंखों के सामने शवों को ट्रॉलियों से नीचे ले जाया जा रहा था। न तो कोई चेतावनी बोर्ड था और न ही खतरे का संकेत। सुरक्षाकर्मी हालात के सामने पूरी तरह बेबस नजर आए। श्रद्धालुओं ने आरोप लगाया कि कटरा स्टेशन पर पुलिस से मदद की उम्मीद टूट गई। उल्टे पुलिस ने सहायता करने के बजाय उन्हें मारपीट कर रोके रखा।
20 की बोतल 50 रुपये में खरीदी
श्रद्धालु शैलेंद्र कुमार ने बताया कि चार दिन तक मोबाइल नेटवर्क और बिजली ठप रही। खाने-पीने का सामान सोने के भाव बिक रहा था। 20 रुपये की बोतल 50 रुपये में खरीदनी पड़ी और बाकी सामान भी चार गुना महंगे दामों पर मिला। नंदलाल मिश्र ने कहा कि उनकी आंखों के सामने बादल फटा और भारी भूस्खलन हुआ। पलक झपकते ही कई लोग पत्थरों की चपेट में आकर घायल हो गए। कमलेश कुमारी ने बताया कि सांसद के प्रयास से 29 अगस्त को सभी जम्मू से अंबाला पहुंचे और वहां से उसी रात ट्रेन से लखनऊ रवाना हुए। लखनऊ पहुंचने के बाद कानपुर-प्रतापगढ़ इंटरसिटी से शनिवार रात अमेठी लौट आए। परिजनों ने सकुशल लौटने पर राहत की सांस ली, लेकिन भय और दहशत का वह मंजर उनकी यादों में हमेशा के लिए दर्ज हो गया। भावलपुर के मौजदा ग्राम प्रधान शिव कुमार ने बताया कि माता की कृपा से हम लोग सकुशल लौट आए। ऐसा मंजर कभी भूल नही पाएंगे। अंबाला पहुंचने के बाद हम लोगों ने राहत की सांस ली थी।