गौरीगंज (अमेठी)। स्थान असैदापुर स्थित विपणन शाखा का गेहूं क्रय केंद्र। समय दोपहर के 12.30 बजे। तेज धूप के बीच क्रय केंद्र खुला था। केंद्र प्रभारी प्रमोद कुमार यादव बैठे अभिलेख तैयार कर रहे थे। पूछने पर बताया कि एक मई से इस केंद्र पर कोई भी किसान नहीं आया है। हमारी तो मजबूरी है, हमें तो आना ही है। बताया कि उनके क्रय केंद्र पर वैसे अब तक 847.50 क्विंटल गेहूं की खरीद 23 किसानों से की गई है। बृहस्पतिवार को यह हाल गेहूं क्रय केंद्रों पर दिखाई दिया। यहां से कुछ दूरी महिला थाने के मोड़ के पास मिले राम अभिलाख, भगीरथ का कहना था कि सरकार गेहूं पर सिर्फ 2125 रुपये प्रति क्विंटल दे रही है, जबकि बाजार में 2250 से 2300 रुपये तक मिलते हैं। खेलावन का कहना था कि सबसे बड़ी सुविधा तो यह है कि व्यापारी गांव में ही पहुंचकर गेहूं खरीद ले रहे हैं।
शायद यही वजह है, जिससे सरकार के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानों का गेहूं खरीदने की मुहिम को करारा झटका लगा है। नामित छह एजेंसी के 71 क्रय केंद्रों पर खरीद प्रक्रिया औंधे मुंह गिर गई है। जिले में सरकारी क्रय केंद्रों पर मात्र 1.74 फीसदी ही गेहूं खरीदा गया।
जिले में गेहूं उत्पादन करने वाले किसानों की उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना के तहत क्रय की जा सके इसके लिए शासन ने छह एजेंसियों के 71 क्रय केंद्रों को मंजूरी दी थी। एक अप्रैल से शुरू हुई खरीद में किसानों को गेहूं बेचने में कोई परेशानी नहीं हो इसके लिए क्रय केंद्रों पर मौजूद स्टॉफ को छाया व पेयजल समेत सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त करने को कहा गया था। शुरुआत में कई दिनों तक तो किसी भी केंद्र की बोहनी नहीं हुई। इसके लिए तमाम कवायद की गई लेकिन हालात जस के तस रहे। जिले में शत प्रतिशत किसानों को फसल समर्थन मूल्य योजना से लाभान्वित करने के लिए जिला प्रशासन लगातार सक्रिय बना रहा।
क्रय केंद्रों पर किसानों की आमद कम होने के बाद जिला प्रशासन ने मोबाइल टीम से गांव-गांव गेहूं खरीद करने की योजना बनाते हुए टीम गठित कर गांव-गांव भेजी। बावजूद इसके सरकारी क्रय केंद्र निर्धारित लक्ष्य के आस-पास भी फटक नहीं पाए। 76 दिन तक चले खरीद के आंकड़े बताते हैं कि 60 हजार एमटी गेहूं खरीद के सापेक्ष महज 1.74 प्रतिशत खरीद हुई है। मीट्रिक टन में बात करें तो क्रय केंद्रों नेे 56 किसानों से 1322.85 मीट्रिक टन गेहूं खरीद की।
एजेंसीवार यह हुई खरीद
खरीद की नोडल एजेंसी विपणन शाखा की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार विपणन शाखा के 16 क्रय केंद्रों पर 352 किसानों से 157.80 एमटी, पीसीएफ के 25 क्रय केंद्रों पर 68 किसानों से 169.60 एमटी, यूपीएसएस के दस क्रय केंद्रों पर 21 किसानों से 96.94 एमटी, यूपीपीसीयू के 13 क्रय केंद्रों पर 25 किसानों से 30.20 एमटी तथा भारतीय खाद्य निगम के पांच क्रय केंद्र पर 32 किसानों से 68 एमटी गेहूं खरीदा गया। आलम यह रहा कि मंडी परिषद के दो व एफसीआई के एक क्रय केंद्र की पूरे सत्र में बोहनी तक नहीं हो पाई।
बाजार में मिली ज्यादा कीमत
कुडवारामपुर गांव निवासी किसान शिवराम पंडित का कहना है कि फसल समर्थन मूल्य योजना के तहत गेहूं बेचने के लिए पंजीकरण कराया गया था। बाजार में केंन्द्र से 200 रुपये प्रति क्विंटल अधिक मूल्य मिल गया तो बाजार में गेहूं बेच दिया।
रामपुर कुड़वा निवासी अमर बहादुर ने बताया कि क्रय केन्द्र पर गेहूं की सफाई, बेचने के लिए नंबर का इंतजार करना पड़ता है, जबकि बाजार में बेचना ज्यादा आसान है। अबकी बार कीमत भी अच्छी मिल गई।
शाहगढ़ निवासी शुभम तिवारी ने बताया कि क्रय केंद्र पर फसल बेचने के बाद भुगतान के लिए प्रतीक्षा करना पड़ता है। इतना कागजी कोरम होता है कि फसल बेचने में कई दिन लग जाते हैं, बाजार में अधिक मूल्य होने से बिक्री करना सुविधा जनक है।
बरना टीकर निवासी जितेंद्र चौहान ने बताया कि सरकारी में बेचने में ज्यादा परेशानी होती है। बाजार में ज्यादा मूल्य मिलने से बिना झंझट गेहूं बिक गया।
बाजार में कीमत अधिक होने से उपजे हालात
बाजार मेंं निर्धारित फसल समर्थन मूल्य से अधिक गेहूं की कीमत होने से क्रय केंद्रों पर लक्ष्य के अनुसार खरीद नहीं हो पाई। लगातार किसानों से संपर्क कर उन्हें योजना का लाभ देने की कोशिश की गई। लेकिन बाजार मूल्य अधिक होने किसानों ने क्रय केंद्र के बजाए बाजार में गेहूं की बिक्री कर दी।
संतोष कुमार द्विवेदी-डिप्टी आरएमओ