जामो (अमेठी)। थाना क्षेत्र के पूरे सुब्बापांडेय मजरे राम शाहनाऊपुर गांव में दो युवकाें की सड़क हादसे में मौत के बाद मातम पसरा है। परिजनोें का रो-रोकर बुरा हाल है। पीड़ित परिवारों के घर शोक संवेदना व्यक्त करने वालों का तांता लगा है।
गांव निवासी सुनील कुमार विश्वकर्मा (20) बृहस्पतिवार दोपहर बाद गांव के ही मोहित कुमार सरोज (23) के साथ बाइक से पीपरपुर थाना क्षेत्र के भेंवई गांव निवासी रिश्तेदार सुनील कुमार के घर भोज में शामिल होने गया था। देर शाम लौटते समय सुल्तानपुर जिले के कोतवाली देहात थाना क्षेत्र के प्रतापगंज बाजार में ट्रक की टक्कर से घायल होने के बाद दोनों की जिला अस्पताल सुल्तानपुर में मौत हो गई। देर रात दोनों की मौत की सूचना गांव पहुंची तो कोहराम मच गया।
रात में ही घर-गांव के लोग सुल्तानपुर के लिए रवाना हो गए। शुक्रवार को युवकों की मौत की सूचना रिश्तेदारों को मिली तो वे भी गांव पहुंच गए। रिश्तेदार व ग्रामीण परिवार के सदस्यों को दुख की घड़ी में सांत्वना देने की कोशिश में लगे हैं। गांव के दो युवकों की मौत से पूरे गांव में शुक्रवार को मातम पसरा रहा। देर शाम तक दोनों के शव गांव आने की उम्मीद है।
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अधूरा रहा गया बेटे के विवाह का सपना
सुनील कुमार विश्वकर्मा की मौत से मां सीमा का रो-रोकर बुरा हाल है। बार-बार बस यही कह रही हैं कि भगवान ये क्या कर दिया। बेटे सुनील को दूल्हे के जोड़े में देखने के बजाए कफन से लिपटा देखना पड़ रहा है। रह-रहकर वह अचेत हो जा रही हैं। बहन कंचन, प्रभावती सदमे में हैं। बड़ा भाई अनिल कुमार बिलख रहा है। पिता जगदीश प्रसाद का मानों सब कुछ लूट गया हो। रोते हुए सिर्फ एक बात कह रहे हैं कि बेटे की शादी तय करने की तैयारी में था। अब अंतिम संस्कार की तैयारी करनी पड़ रही है। अविवाहित सुनील घर पर रहकर खेती-बाड़ी में पिता की मदद करता था।
मना किया, लेकिन नहीं माना मोहित
मोहित की मौत के बाद पूरा परिवार बिखर गया। रोते हुए मोहित की मां विमला सिर्फ एक ही बात कहती रहीं कि सुनील के साथ जाने की जानकारी के बाद मना किया था, लेकिन नहीं माना। पिता गुरुचरन प्रसाद व मां विमला का छोटा बेटा अविवाहित मोहित उनका दुलारा था। परिजन उसकी हर जिद पूरी करते थे। मां विमला का रो-रोकर बुरा हाल है। पिता गुरुचरन प्रसाद की आंखें पथरा गई हैं। बहन गीतांजलि व बड़े भाई रोहित कुमार की सिसकियां हर किसी की आंखें नम कर दे रही हैं।
साथ जिये और साथ ही मरे
गांव में मोहित व सुनील की दोस्ती की मिसाल दी जाती थी। दोनों सिर्फ सोनेभर के लिए एक-दूसरे से अलग होते थे। दोनों की एक साथ मौत के बाद ग्रामीणों में इस बात की चर्चा रही कि साथ जिये और मरे भी साथ ही। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि अखिलेश मिश्र ने बताया कि दोनों बहुत मिलनसार व लोगों के मददगार थे। ग्रामीणों के सुख-दुख में शामिल होते थे।