फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Amethi News: ठंड ने तोड़ा पांच साल का रिकॉर्ड

Sat, 10 Jan 2026 12:48 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
विज्ञापन
विज्ञापन
अमेठी सिटी। माघ माह में पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बर्फबारी और पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से इस साल ठंड का असर ज्यादा देखने को मिल रहा है। बृहस्पतिवार रात और शुक्रवार सुबह इस सीजन की अब तक की सबसे ठंडी रही। न्यूनतम तापमान पांच डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो बीते छह वर्षों में सबसे कम है। इससे पहले वर्ष 2021 में जनवरी के दूसरे सप्ताह में न्यूनतम तापमान 5.3 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था।
विज्ञापन



जिले में शुक्रवार को दिन की शुरुआत धुंध के साथ हुई। सुबह 11 बजे तक घना कोहरा छाया रहा, जिससे दृश्यता काफी कम रही। दोपहर 12 बजे के बाद कोहरा छटा तो धूप निकली, लेकिन सर्द पछुआ हवा के कारण ठंड से राहत नहीं मिली। पांच किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही हवा ने पूरे दिन गलन बनाए रखी। हाईवे पर फॉग लाइट के सहारे वाहन रेंगते नजर आए। शाम सात बजे के बाद बाजारों में सन्नाटा छा गया। बृहस्पतिवार को अधिकतम तापमान 15 डिग्री और न्यूनतम तापमान पांच डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।


मौसम विभाग ने शुक्रवार के लिए कोल्ड डे का अलर्ट जारी किया। गलनभरी ठंड ने आम जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। सुबह घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया। जरूरी काम से निकले लोग भी ठंड से बचाव के उपाय करते दिखाई दिए। सड़कों और बाजारों में चहल-पहल कम रही। शुक्रवार का दिन इस साल का सबसे ठंडा दिन रहा। शीतलहर के साथ तापमान पांच डिग्री तक पहुंच गया। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक लोग घरों में दुबके रहे। जगह-जगह लोग ठंड से बचने के लिए आग जलाकर बैठे दिखाई पड़े।
विज्ञापन



दोपहर करीब एक बजे धूप जरूर निकली, लेकिन सर्द हवा के कारण असर सीमित रहा। चार बजे के बाद करीब चार किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली पछुआ हवा ने गलन और बढ़ा दी। इससे दो पहिया वाहन चालकों को सबसे अधिक परेशानी हुई। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अगले दो दिनों में ठंड और बढ़ सकती है। तापमान में और गिरावट के साथ कोहरा और बादलों की आवाजाही बनी रहने के आसार हैं।



कड़ाके की ठंड का असर खेती-किसानी पर भी पड़ रहा है। सुबह और शाम खेतों में काम करना मुश्किल हो गया है। किसानों के अनुसार लंबे समय तक गलन रहने से आलू और टमाटर की फसल में पाले का खतरा बढ़ गया है, जिससे उत्पादन प्रभावित हो सकता है। हालांकि, यह ठंड गेहूं की फसल के लिए अनुकूल मानी जा रही है। ठंड से पशु-पक्षी भी बेहाल हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें