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Amethi News: तत्कालीन नायब तहसीलदार पर कार्रवाई की तलवार

Sun, 21 May 2023 12:07 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
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384 करोड़ के मुआवजा घोटाले में अनुशासनात्मक जांच शुरू
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संवाद न्यूज एजेंसी
गौरीगंज (अमेठी)। मुसाफिरखाना तहसील से होकर गुजरने वाले एनएच-56 के दो बाईपास के मुआवजा वितरण में हुए 384 करोड़ के घोटाले की जांच तेज हो गई है। जिला प्रशासन की रिपोर्ट पर मुसाफिरखाना तहसील की तत्कालीन नायब तहसीलदार श्रद्धा पांडेय के खिलाफ राजस्व परिषद ने अनुशासनात्मक जांच का आदेश दिया है। जांच की जिम्मेदारी अपर आयुक्त प्रशासन अयोध्या को दी गई है।
मुसाफिरखाना तहसील से गुजरने वाले लखनऊ-वाराणसी राजमार्ग 56 से जुड़े दो बाईपास के निर्माण की कवायद वर्ष 2015 के बाद शुरू हुई थी। इसके लिए अधिग्रहित भूमि के मुआवजा वितरण में 384 करोड़ रुपये से अधिक का घपला सामने आया था। मामले की जांच कर रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी। इसके बाद एक-एक करके जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई की जा रही है। शासन की ओर से मामले में शामिल रहे तत्कालीन एसडीएम अशोक कनौजिया के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई शुरू हो गई है। गत दिनों अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के भूमिका से जुड़े साक्ष्य व रिपोर्ट तलब की गई थी। रिपोर्ट मिलने के बाद तत्कालीन नायब तहसीलदार व तहसीलदार की भूमिका की रिपोर्ट राजस्व परिषद को व अन्य अधिकारियों को शासन में भेजी गई थी। रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए राजस्व परिषद ने तत्कालीन नायब तहसीलदार (मौजूदा समय तहसीलदार फर्रुखाबाद) श्रद्धा पांडेय के खिलाफ अनुशासनात्मक जांच की संस्तुति की है। घपले में श्रद्धा की क्या भूमिका रही इसकी विस्तृत जांच के लिए अपर आयुक्त प्रशासन अयोध्या को जांच अधिकारी बनाया गया है। उनसे दो माह में जांच पूरी कर रिपोर्ट देने को कहा गया है।
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पिछले माह भेजी गई थी चार्जशीट
शासन के निर्देश पर एसडीएम स्तर से नीचे के अधिकारियों के विरुद्ध चार्जशीट पिछले माह भेजी गई थी। इनमें से तत्कालीन तहसीलदार रहे यशवंत राव का प्रमोशन होने के कारण उनके खिलाफ नियुक्ति विभाग को चार्जशीट भेजने को कहा गया था। जबकि तत्कालीन नायब तहसील व वर्तमान में तहसीलदार श्रद्धा पांडेय के खिलाफ चार्जशीट भेजी गई थी। इस पर तेजी से निर्णय लेते हुए राजस्व परिषद की ओर से जांच शुरू कर दी गई है।
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कई अन्य अधिकारी भी लपेट में
384 करोड़ रुपये के मुआवजा वितरण घोटाले में श्रद्धा के अलावा उस दौर में मुसाफिरखाना में तैनात रहे सात एसडीएम (इनमें एक एसडीएम सेवानिवृत्त हो चुके तो दो एडीएम बन चुके हैं) भी लपेटे में हैं। सभी के खिलाफ शासन गोपनीय जानकारी जुटाने के साथ जिला प्रशासन से लगातार साक्ष्य व रिपोर्ट भी मंगा रहा है। इस मामले में शासन की गंभीरता को देखते हुए माना जा रहा है कि जांच पूरी होने के बाद कई अफसर नापे जा सकते हैं।
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