अमेठी। मृतक शिक्षक के पिता रामगोपाल ने बताया कि सुनील पहले मेहनत मजदूरी करते हुए पढ़ाई भी करता था। उसने मनरेगा में भी काम किया। भट्ठे पर ईंटें भी पाथीं। ठेके पर लोगों के घर भी बनवाए। दुकान भी खोली थी। काम भी करता था और पढ़ाई भी करता था। बताया कि बेटा सुनील बहुत मेहनती था। उसे काम में कोई आलस नहीं था। वह परिवार का सबसे होनहार बेटा था। मेहनत का ही नतीजा था कि उसकी पुलिस में नौकरी लग गई थी। एक साल पुलिस की नौकरी करने के बाद उसने तैयारी कर शिक्षक भर्ती में सफलता हासिल की।
....तो हत्यारों ने गांव तक किया पीछा
शिक्षक सुनील कुमार के पिता की मानें तो कुछ दुश्मन उनको मारने का कब से इंतजार कर रहे थे। बताया कि रायबरेली में कमरा लेकर उनका बेटा रहता था, लेकिन एक दिन कुछ लोगों ने गांव भी पहुंचकर मारने की कोशिश की थी। लेकिन बाद में उसे मामले की जानकारी हुई, जिसके बाद उसने केस दर्ज करवाया था। फिर रायबरेली में कमरा छोड़कर स्कूल के पास शिवरतनगंज क्षेत्र में कमरा लिया था। वहीं पड़ोसी दीपक सिंह ने बताया कि मुझे जैसे ही जानकारी मिली मैं सुनील के घर पहुंचा। किसी से इनका विवाद चल रहा था। एसटी-एससी का मुकदमा रायबरेली में दर्ज कराया था।
जल्द होगा वारदात का खुलासा
आईजी प्रवीण कुमार ने कहा कि जिस घर में वारदात हुई है, वहां किसी के फोर्स फुल इंट्री करने के निशान नही मिले हैं। बच्चों की हत्या का मतलब होता है कि वह किसी को पहचान रहे थे। फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्यों को संकलित किया है। करीबियों के भी हत्या करने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सका। चार टीमें लगाई गईं हैं। जांच टीम को कुछ अहम साक्ष्य मिले हैं। जल्द ही वारदात का खुलासा कर दिया जाएगा।