अमेठी सिटी। सरकारी अस्पताल में मरीजों को घटिया एंटीबायोटिक कैप्सूल बांटने का मामला सामने आया है। इसके बाद आनन-फानन में बृहस्पतिवार की देर शाम से वितरण पर रोक लगा दी गई है। सभी सीएचसी प्रभारियों को यह दवा अलग रखने को कहा गया है। जिला अस्पताल से जुड़े सीएचसी व पीएचसी में पहुंचे कैप्सूल के वितरण पर रोक लगा दी गई ह।
यूपी मेडिकल कॉर्पोरेशन ने अमेठी समेत अन्य जिलों में अगस्त 2023 में सर्दी, खांसी, जुकाम व बुखार में मरीजों को देने के लिए एंटीबायोटिक सिफ्लॉक्सिन 250 एमजी कैप्सूल की आपूर्ति की थी। अमेठी में 9 अगस्त 2023 को 50 हजार कैप्सूल का आवंटन हुआ था। जिले के अस्पतालों में अब तक 48 हजार 500 कैप्सूल का वितरण कर दिया गया। जिला स्तर पर गोदाम में इस बैच नंबर की मात्र 1500 कैप्सूल ही एंटीबायोटिक दवा बची है। दवा का सैंपल आजमगढ़ में औषधि विभाग की टीम ने लिया था। अब नमूने की जांच रिपोर्ट आई है। इसमें यह दवा अधोमानक मिली है।
सीएमओ डॉ. अंशुमान सिंह ने बताया कि वितरण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दिया गया है। सीएचसी व पीएचसी प्रभारियों से कहा गया है कि उनके यहां जो भी दवा बची हो, उसे ड्रग वेयर हाउस में वापस कर दें। साथ ही अन्य दवाओं के स्टॉक की स्थिति भी मांगी गई है। जिससे मरीजों को कोई परेशानी न हो।
पहले भी फेल हो चुका है नमूना
- बीते वर्ष 2022 में जिले में मिर्गी की दवा का नमूना फेल होने का मामला आया था। उस वक्त सितंबर 2021 में मिर्गी की दवा क्लोबाजम पांच एमजी की 65 हजार टैबलेट की आपूर्ति की गई थी। बरेली में हुई जांच में एक साल बाद यह नमूना फेल हो गया था। इसके बाद दवा वापसी का आदेश दिया गया था।
सीएमओ ने चौराहे पर देखा मरीज
तिलोई(अमेठी)। बृहस्पतिवार की सुबह मुख्यालय जाते समय सीएमओ डॉ. अंशुमान सिंह ने बहादुरपुर चौराहे पर हिंदुस्तान धर्मकांटे पर एकाएक रूक गए। वहां पर सर्दी, जुकाम, जकड़न, सांस लेने में दिक्कत महसूस कर रहे कई मरीजों का चिकित्सकीय परीक्षण कर इलाज के लिए उचित सलाह दी।