मुसाफिरखाना। लखनऊ-वाराणसी हाईवे पर मंगलवार भोर में दृश्यता लगभग न के बराबर थी। ट्रक जब डिवाइडर पर चढ़ा तो ड्राइवर ब्रेक लगाकर गाड़ी से उतर गया। वह संकेतक के तौर पर ट्रक की पार्किंग लाइट जलाता या कुछ और इंतजाम करता, इसके पहले ही वाहनों की भिड़ंत शुरू हो गई। महज तीन मिनट के भीतर छह वाहन आपस में टकरा गए।
बस के पीछे जो कार टकराई थी, उसमें दूसरे वाहनों से इतनी टक्करें लगीं कि कार बस में घुस गई और पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। राहत की बात यह रही कि भिड़ंत से पहले कार में बैठी सवारियां उतर चुकी थी। इससे उनकी जान बच गई। हादसा होने के करीब 15 मिनट के भीतर पुलिस फोर्स मौके पर पहुंच गई।
सीओ मुसाफिरखाना ने ओवरब्रिज पर वाहनों का आवागमन रोकने के साथ ही ओवरब्रिज के पहले 50-50 मीटर पर दो-दो पुलिसकर्मी टॉर्च लेकर खड़े कर दिए, जो वाहन चालकों को सचेत कर ओवरब्रिज की सर्विस रोड से निकलने की जानकारी दे रहे थे। इससे ओवरब्रिज पर वाहनों का आवागमन पूरी तरह रोकने में प्रभावी मदद मिली। मौके पर छह पीआरवी, एंबुलेंस के अलावा फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियां भी बचाव कार्य के लिए बुला ली गईं थी।
ट्रकों के केबिन में फंसे चालक : हादसे में तीन ट्रकों का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इनमें से दो ट्रकों में चालक फंस गए। फायर ब्रिगेड की टीम ने गैस कटर से केबिन को काटकर ट्रक चालक मोहम्मद शमशाद और मंजीत को बाहर निकाला। हालांकि, उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
पीआरवी और एंबुलेंस से भेजे गए बस यात्री : जनरथ बस पर करीब 30 यात्री सवार थे। इनमें से 16 को चोट लगी थी। सभी को पीआरवी और एंबुलेंस से सीएचसी मुसाफिरखाना पहुंचाया गया। हादसे के बाद बस यात्री सबसे ज्यादा खौफजदा दिखे, जो लखनऊ से वाराणसी की ओर जा रहे थे। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अंशुमान सिंह भी हादसे की सूचना पाकर भोर में ही सीएचसी पहुंच गए। उन्होंने टीम बुलाकर घायलों का त्वरित उपचार शुरू कराया।
तीन घंटे प्रभावित रहा आवागमन हादसे के बाद हाईवे पर करीब तीन घंटे तक आवागमन प्रभावित रहा। क्षतिग्रस्त वाहनों को हाईवे से हटाने के बाद सुबह करीब पांच बजे हाईवे पर आवागमन पुन: शुरू हो सका।