अमेठी सिटी। सुल्तानपुर से तस्करी कर कोलकाता ले जाए जा रहे भारी मात्रा में बेशकीमती कछुओं के साथ दो महिला सहित छह तस्कर पकड़े गए हैं। अमेठी पुलिस, एसओजी व वन विभाग की संयुक्त टीम ने तस्करों से पूछताछ शुरू कर दी है। यह कछुए बैग में भरकर ई-रिक्शा से ले जाए जा रहे थे।
पुलिस के मुताबिक इनपुट मिले थे कि कुछ तस्कर सुल्तानपुर से अमेठी होकर ट्रेन के जरिए कोलकाता कछुओं की तस्करी कर ले जा रहे हैं। अमेठी पुलिस, एसओजी व वन विभाग की टीम सक्रिय हुई। टीम ने सूचना के मुताबिक अमेठी बाईपास के पास एक ऑटो रिक्शा को रोका। उस पर सवार लोगों से पूछताछ की और तलाशी ली तो कछुआ तस्करी का बड़ा मामला प्रकाश में आया।
पुलिस के मुताबिक पकड़े गए लोगों में सुल्तानपुर जिले के पकड़ी दुबेपुर गांव निवासी महिला कंचन, महतिन उर्फ मीरा, महेश, अमर व प्रकाश और अयोध्या के इनायतनगर थाना क्षेत्र के चमैला गांव निवासी ई रिक्शा चालक ओम प्रकाश प्रजापति नाम के लोग पकड़े गए। इन लोगों की तलाशी ली गई तो इनके बैगों से 76 कछुए बरामद हुए।
पूछताछ में इन लोगों ने बताया कि वह लोग सुल्तानपुर से कछुओं को एकत्र किया था। इन बेशकीमती कछुओं को तस्करी कर कोलकाता ले जाया जा रहा था। कोलकाता जाने के लिए यह लोग अमेठी पहुंचे थे। अमेठी रेलवे स्टेशन से पंजाब मेल ट्रेन से इनको गंतव्य के लिए जाना था। इसी बीच पुलिस ने दबोच लिया। आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। एएसपी हरेंद्र प्रताप ने बताया कि कछुआ तस्करी के मामले में पांच लोग पकड़े गए हैं। मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
दो प्रजातियों के मिले कछुए
वन विभाग के अफसरों ने बताया कि बरामद 76 कछुए दो प्रजातियों के हैं। इनमें नीलसोनिया गैंगटिका प्रजाति के 66 कछुए हैं और लेसेमी प्यूनिक्टा प्रजाति के 10 कछुए बरामद किए गए हैं। इनकी अंतराष्ट्रीय बाजार में कीमत 10 से 15 लाख के करीब हो सकती है।
इस रूट से होती है तस्करी
अमेठी में कछुआ तस्करों का गिरोह अर्से से सक्रिय है। डीएफओ के मुताबिक जगदीशपुर इलाके सहित कुछ बस्तियों में रह रहे लोग इसमें कई बार लिप्त पाए गए हैं। राजबहादुर नाम का व्यक्ति इनका सरगना है। उसे कुछ माह पूर्व पकड़ा गया था। यह लोग नदी, तालाबों से कछुओं को एकत्र कर तस्करी करते हैं। सुल्तानपुर व अमेठी से यह लोग बनारस, चंदौली के रास्ते बिहार के गया पहुंचते हैं।
उनका दावा है कि इसी रूट पर ले जाने के बाद गया में पश्चिम बंगाल के तस्कर पहुंचते हैं। जिसके बाद कछुओं को संभवत: बंगाल के जरिए चीन भेजा जाता है। इन कछुओं से शक्ति वर्धक दवाएं बनाई जाती हैं। लोग इनको खाने में भी इस्तेमाल करते हैं।