गौरीगंज (अमेठी)। नवजात के गंभीर रूप से बीमार होने पर उन्हें रेफर नहीं करना पड़ेगा। जिला अस्पताल में ही उन्हें इलाज की सुविधा मिल सकेगी। इसके लिए अस्पताल के मैटरनिटी विंग में 12 बेड का सिक न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) तैयार की जा रही है। शासन द्वारा इसके लिए 41 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से 16 लाख रुपये रिलीज भी कर दिए गए हैं।
जिले में अब तक नवजात बच्चों के गंभीर रूप से बीमार होने पर उन्हें इलाज के लिए दूसरे जिले रेफर करना पड़ता था। अकसर जन्म के बाद कुछ बीमार नवजातों को इलाज की जरूरत पड़ती है। ऐसे में जिले के सरकारी अस्पताल में इसकी व्यवस्था नहीं होने पर नवजात के परिजनों को उन्हें दूसरे जिलों में ले जाना पड़ता था।
शासन के निर्देश पर जिला अस्पताल परिसर में स्थित मैटरनिटी विंग में 12 बेड की सिक न्यूबॉर्न केयर यूनिट तैयार की जा रही है। इसके लिए शासन की ओर से 41 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। वहीं 16 लाख रुपये अवमुक्त भी कर दिए गए हैं। इसके लिए यूनिसेफ के डॉ. नितेश ने सीएमएस डॉ. बीपी अग्रवाल के साथ मैटरनिटी विंग का निरीक्षण कर यूनिट तैयार करने के लिए रूपरेखा तैयार की। उन्होंने मिली राशि के सापेक्ष अविलंब निर्माण कार्य शुरू कराने का निर्देश दिया।
क्या है एसएनसीयू
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. बद्री प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि सिक न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) नवजात के गंभीर रूप से बीमार होने पर इलाज के लिए होती है। कहा कि इस यूनिट में 28 दिन तक के नवजात शिशुओं का इलाज किया जाता है। यहां नवजात के लिए नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (एनआईसीयू) के साथ ही क्रिटिकल स्थिति के समय उपयोग होने वाले वार्मर, फोटोथेरेपी यूनिट समेत सभी उपकरण स्थापित रहते हैं। जिससे बच्चे को तत्काल इलाज की सुविधा मिल सके।
बाहर पैदा हुए बच्चों का भी होगा इलाज
सीएमएस डॉ. बीपी अग्रवाल ने बताया कि यूनिट में कुल 12 बेड होंगे। इसमें से छह बेड जिला व अन्य सरकारी अस्पताल में जन्म लेने वाले तो छह ऐसे नवजात जिनका जन्म किसी अन्य अस्पताल में हुआ हो उनके लिए आरक्षित रहेगा। नवजात को परेशानी होने पर उन्हेें तत्काल इलाज मिलेगा। कहा कि वार्ड निर्माण के लिए चार लाख रुपये तो उपकरण खरीद के लिए 12 लाख रुपये रिलीज हो गए हैं। बाकी 25 लाख रुपये भी जल्द ही रिलीज होंगे।