अमेठी स्थित गायत्री शक्तिपीठ में साधना करते साधक। स्रोत: गायत्री परिवार
अमेठी। गायत्री शक्तिपीठ में चल रहे 40 दिवसीय गायत्री साधना के 29वें दिन बृहस्पतिवार को प्रातःकाल पूजन-अर्चन हुआ। इस दौरान साधकों को दुष्प्रवृत्तियों से बचने और सद्मार्ग पर चलने का संदेश दिया गया।
पंडित राधेश्याम त्रिपाठी ने कहा कि परमात्मा सत्य, चित और आनंद स्वरूप है, जबकि मनुष्य असत्य, अज्ञान और दुखों में भटक रहा है। व्यक्तिगत और सामूहिक दुखों के पीछे दुष्प्रवृत्तियां प्रमुख कारण हैं। इन्हें माया, असुरता और अविद्या आदि नामों से भी जाना जाता है।
उन्होंने कहा कि जब मनुष्य सही दिशा से भटकता है तो उसके विचार, व्यवहार और कर्म भी विपरीत दिशा में जाने लगते हैं। इससे जीवन में अशांति और दुख उत्पन्न होते हैं। उन्होंने कहा कि गायत्री महामंत्र का उद्देश्य मनुष्य की दुष्प्रवृत्तियों का निवारण कर उसे सद्मार्ग की ओर प्रेरित करना है। जो व्यक्ति दुष्प्रवृत्तियों से बचने और सत्य के मार्ग पर चलने का संकल्प लेता है, वही वास्तविक अर्थों में गायत्री का उपासक है। इस मौके पर सुभाष चंद्र द्विवेदी, जितेंद्र कुमार सिंह, लाल अशोक सिंह, अशोक बरनवाल, अशोक शर्मा, रामादेवी, संगीता, ममता और सुनीता आदि मौजूद रहे।