अमेठी सिटी। यूपी बोर्ड परीक्षा में हाईस्कूल के जिला टाॅपर बने सौरभ सिंह की कहानी औरों से अलग है। दरअसल, पिता किसान हैं। महज दो बीघे खेती है। किसी तरह से परिवार का गुजारा होता है, इसके बाद भी सौरभ ने कठिन मेहनत के दम पर 96.33 फीसदी अंक हासिल कर सफलता हासिल की है। वह आईएएस बनना चाहते हैं। गौरीगंज शहर के श्रीरणंजय इंका के छात्र सौरभ सिंह सरैया हरखपुर के निवासी है। पिता कुंवर बहादुर सिंह व मां संगीता सिंह किसान है। बड़ा भाई सचिन सिंह लखनऊ में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा है। बकौल, सौरभ उसने तैयारी के लिए कोई कोचिंग नहीं की। सिर्फ स्कूल में जो भी पढ़ाया जाता था, उस पर ही वह आश्रित था। उसने विषयवार समय सारिणी बनाई थी। हर विषय को समान अवसर देता था, जिस विषय में कोई दिक्कत आती थी, उसके लिए वह संबंधित शिक्षक से मार्गदर्शन लेता था। कहा कि कई बार मन में आया कि कोचिंग कर लें लेकिन, परिवार की स्थिति देखकर उसने कोई नहीं की।
सौरभ कहते हैं कि वह आईएएस बनना चाहते हैं। सबसे पहले शिक्षा, स्वास्थ्य व परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाना प्राथमिकता है। वह अपनी सफलता का सारा श्रेय शिक्षकों व गुरुजनों को देते हैं।
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हमारे पास तो इतने पैसे भी नहीं थे...
पिता कुंवर बहादुर सिंह की आंखों में बेटे की सफलता के आंसू हैं। नम आंखों व रूधे गले से वह सिर्फ इतना कहते हैं कि हमने जो सोचा नहीं था, वह आज हो गया। बेटे ने कमाल कर दिया। हमारे पास तो इतने पैसे भी नहीं थे कि हम कोचिंग करा सके। कहा था कि पापा हमें किताबें दिलवा दीजिए। किसी तरह से ज़ुगाड़ करके तीन हजार रुपये में किताबें दिलवा दी। बेटे ने पढ़कर नाम रोशन कर दिया।
सौरभ के पास नहीं है मोबाइल फोन
- हाईटेक जमाने में भी सौरभ के पास मोबाइल फोन तक नहीं है। वह प्रतिदिन क्लास करता था। एक भी दिन उसका क्लास नहीं छूटता था। यहां तक कि बीमारी की अवधि में भी वह हर रोज स्कूल जाता था। सौरभ की सफलता पर काॅलेज प्रबंधक पंडित जगदंबा प्रसाद त्रिपाठी मनीषी, प्रधानाचार्य सुनील शुक्ल, राकेश त्रिपाठी, शिव मूर्ति पांडेय, विजय श्रीवास्तव, सचिन मिश्र, अरूणेश मिश्र सहित अन्य शिक्षकों ने बधाई दी है।