अमेठी सिटी। ग्राम पंचायतों के विकास के लिए शासन की ओर से करोड़ों रुपये का बजट दिया गया है, लेकिन कई पंचायत सचिवोें व प्रधान की लापरवाही के चलते विकास का पैसा डंप हो गया है। ग्राम पंचायतों में विकास कार्य नहीं होने को डीपीआरओ ने गंभीरता से लिया है। इसमें जिले के 52 पंचायत सचिवों को नोटिस भेजते हुए जुलाई माह का वेतन अग्रिम आदेशों तक रोक दिया गया है। डीपीआरओ की समीक्षा बैठक में कार्रवाई तय की गई है। वहीं सोमवार को डीएम निशा अनंत भी लापरवाह अधिकारियों की खबर लेंगी।
जिले में कुल ग्राम पंचायतों की संख्या 682 है, वहीं कुल 987 राजस्व ग्राम हैं। जहां ठोस-द्रव कचरा प्रबंधन के कार्य, राज्य वित्त, केंद्र वित्त की धनराशि विकास कार्यों के लिए प्रस्तावित की गई है। कई गांवों में लक्ष्य के अनुरूप विकास कार्य नहीं होने से पंचायतीराज ने सख्ती दिखाई है।
जिला पंचायत राज अधिकारी मनोज कुमार त्यागी ने बताया कि वर्ष, 2023-24 में प्रस्तावित कार्यों के लिए कार्रवाई हुई है। ठोस-द्रव कचरा प्रबंधन में 50 प्रतिशत से कम खर्च करने वाले, राज्य वित्त का 70 प्रतिशत से कम व केंद्रीय वित्त का 60 प्रतिशत से कम खर्च करने वाले पंचायत सचिवों को चेतावनी जारी की गई है। इसमें प्रत्येक विकासखंड में न्यूनतम खर्च करने वाले चार अधिकारियों का वेतन रोका गया है। डीपीआरओ ने बताया कि डीएम की समीक्षा के बाद अन्य लोगों पर भी कार्रवाई हो सकती है। इसमें अभी तक कुल 13 विकासखंडों के 52 सचिवों का वेतन रोक दिया गया है।
जनप्रतिनिधियों से बना रहे दबाव
जिले में बड़ी संख्या में पंचायत सचिवों का वेतन रुकने के बाद भी संबंधित अधिकारी कार्य पूरा करने के बजाय डीपीआरओ पर दबाव बनाने में लगे हुए हैं। इसके लिए वह जनप्रतिनिधियों का सहारा ले रहे हैं। फिलहाल डीपीआरओ का कहना है कि किसी भी वेतन निरस्त नहीं किया गया है। वेतन सिर्फ रोका गया है, कार्य पूरा करने पर वेतन जारी कर दिया जाएगा।