अमेठी गायत्री शक्तिपीठ में जप करते साधक।-संवाद
अमेठी। गायत्री शक्तिपीठ में आयोजित 40 दिवसीय जप अनुष्ठान के दौरान रविवार को पुजारी पंडित इंद्रदेव शर्मा ने कहा कि साधना का अर्थ है परम निर्मलता, अपने आंतरिक दोषों को जड़ से मिटाना और जीवन को पतित करने वाली प्रवृत्तियों के खिलाफ पूरी तत्परता से खड़े रहना।
अध्यात्म पथ की सबसे बड़ी कठिनाई समय-समय पर उठने वाले संदेह, शंकाएं और विस्मृतियां हैं। यदि इनका समाधान न किया जाए तो साधक आंतरिक रूप से जड़ और बाह्य रूप से अव्यवस्थित हो जाता है। इसलिए हर साधक को धैर्य और अनुशासन से साधना के विधान को अपनाना चाहिए।
रक्षाबंधन पर्व पर साधकों ने मां गायत्री, गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य और भगवान शिव की प्रतिमा पर पुष्पार्चन कर मंगलकामनाएं कीं। शनिवार और रविवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने साधना कक्ष में अनुष्ठान किया। मंत्र जप में पं. शिव प्रसाद तिवारी, अनिल तिवारी, दयानंद सिंह, डॉ. सत्येंद्र कुमार श्रीवास्तव, संगीता शर्मा, शीला जायसवाल, सुनीता सिंह, शकुंतला पांडेय, बिंदू सिंह, डॉ. त्रिवेणी सिंह आदि शामिल हुए।