संग्रामपुर (अमेठी)। स्थानीय थाना क्षेत्र के मिश्रौली स्थित रेलवे स्टेशन के मुख्य गेट से परिसर तक बनी सड़क छह माह में जर्जर हो गई। सड़कों के गड्ढों में पानी भर गया है। ऐसे में लोगों को जोखिम के साथ सफर करना पड़ता है। प्रतिदिन मुख्य गेट से टेंपो, ई-रिक्शा, कार तथा दो पहिया वाहन से लोग रेलवे स्टेशन आते हैं। कई बार मांग के बावजूद सड़क मरम्मत को लेकर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
संग्रामपुर क्षेत्र से प्रतिदिन अधिक संख्या में लोग मिश्रौली रेलवे स्टेशन से पीआरएल व जनता ट्रेन से प्रयागराज, प्रतापगढ़, रायबरेली, लखनऊ के जिले में सफर करते हैं। रेलवे लाइन दोहरीकरण के साथ ही मिश्रौली रेलवे स्टेशन को उच्चीकृत किया गया है। स्टेशन के सामने लोहे की जाल की बाउंड्री भी की गई है।
दो अप्रैल को मिश्रौली रेलवे स्टेशन का निरीक्षण व नई रेलवे लाइन पर ट्रेन का ट्रायल करने मुख्य रेलवे संरक्षा आयुक्त शैलेश कुमार पाठक मिश्रौली रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। पाठक के आने की सूचना जैसे ही विभागीय अधिकारियों को हुई वैसे ही युद्ध स्तर पर स्टेशन पर अधूरे कामों को पूरा करने की कवायद शुरू की गई थी।
आनन फानन रात में स्टेशन परिसर में सड़क का निर्माण भी करा दिया गया। नतीजा यह निकला कि कुछ ही महीनों बाद जगह-जगह सड़क उखड़ने लगी। वहीं छह महीने में ही मुख्य गेट पर सड़क पूरी तरह बदहाल हो गई। जिसमें इन दिनों जलभराव की समस्या उत्पन्न हो गई है। लोगों ने मुख्य गेट की सड़क को दुरुस्त कराने की मांग रेलवे के अधिकारियों से की है।
एक बारिश भी नहीं झेल सकी सड़क
लालता प्रसाद मिश्र ने कहा कि छह महीने पहले सीआरएस के आने के संकेत मिलते ही कार्यदायी संस्था ने रातों-रात सड़क का निर्माण करा दिया। गुणवत्ता सही न होने के कारण चंद दिनों में सड़क खराब हो गई। जलभराव से यात्रियों को स्टेशन तक पहुंचने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सत्य प्रकाश मिश्र रिंकू ने कहा कि बारिश के समय स्टेशन पहुंचना कठिन हो जाता है। मुख्य गेट पर कई कई दिनाें तक पानी भरा रहता है, वाहन भी फंस जाते हैं। छह महीने में ही सड़क खस्ताहाल हो गई है। नितिन तिवारी ने कहा कि रेलवे द्वारा बनवाई गई सड़क एक बारिश भी नहीं झेल पाई। रेलवे प्रशासन को इसकी जांच करा कर कार्यदायी संस्था पर कार्रवाई करनी चाहिए।