आरजीआईपीटी में अपशिष्ट पदार्थों से गैस बनाने की प्रक्रिया देखते संस्थान के अधिकारी व अन्य। स्
जायस। राजीव गांधी पेट्रोलियम प्रौद्योगिकी संस्थान (आरजीआईपीटी) में सोमवार को शून्य अपशिष्ट दिवस के अवसर पर नई व्यवस्था की शुरुआत हुई। परिसर में एकीकृत अपशिष्ट जल और बायोगैस संसाधन संयंत्र चालू होने से अब भोजनालय और रसोई से निकलने वाला कचरा बेकार नहीं जाएगा, बल्कि इससे बायोगैस व खाद बनाई जाएगी।
संस्थान परिसर में प्रतिदिन निकलने वाला जैविक कचरा अब सीधे संयंत्र में डाला जा रहा है। इस प्रक्रिया में कचरे से गैस तैयार होगी, जिसका उपयोग ऊर्जा के रूप में किया जाएगा। इससे भोजन बनाने सहित अन्य कार्यों में सहूलियत मिलेगी। कचरे से बचा अवशेष जैविक खाद में बदल रहा है, जो पौधों की वृद्धि के लिए उपयोगी रहेगा। संयंत्र में जल शोधन की व्यवस्था भी की गई है।
शोधन के बाद प्राप्त जल का उपयोग मछली पालन और परिसर की हरियाली बनाए रखने में किया जाएगा। इस व्यवस्था से जल की बचत के साथ उसका सही उपयोग सुनिश्चित होगा। संस्थान के अधिकारियों ने बताया कि इस पहल से कचरे के निस्तारण की समस्या कम होगी और परिसर को स्वच्छ रखने में मदद मिलेगी।
कार्यक्रम के दौरान स्वच्छता और संरक्षण के महत्व पर चर्चा हुई। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. रवींद्र प्रताप सिंह, संस्थान के निदेशक प्रो. हरीश हिरानी, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के कार्यकारी निदेशक रवि प्रकाश और पंजाब रिन्यूएबल एनर्जी सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक लेफ्टिनेंट कर्नल (रिटायर्ड) मोनीश आहूजा सहित बहादुर ब्लॉक के जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।