जायस (अमेठी)। आईसीटी, मुंबई के कुलपति प्रो. अनिरुद्ध बी पंडित ने कहा कि जैव ऊर्जा एवं हाइड्रोजन ऊर्जा सामाजिक सशक्तीकरण, आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण में उत्प्रेरक का कार्य कर रही है। युवा शोधार्थियों को इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए। वह शनिवार को राजीव गांधी पेट्रोलियम प्रौद्योगिकी संस्थान में रासायनिक अभियांत्रिकी छात्र महासम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
शनिवार को विशिष्ट व्याख्यान में एचपीसीएल रिफाइनरीज के निदेशक एस. भारतन ने रासायनिक अभियांत्रिकी के नए प्रतिमान विषय पर विचार रखे। बताया कि शीर्ष 10 आविष्कार पोर्टेबल पानी, गैसोलीन, एंटी बॉयोटिक्स, जीवाश्म ईंधन से बिजली उत्पादन, टीके, प्लास्टिक, उर्वरक ने समाज पर बड़ा प्रभाव डाला है। इंडोरामा जगदीशपुर के सीईओ राजेंद्र सांख्ये ने उद्योगों के विकास पर प्रकाश डाला।
जीवन का महत्वपूर्ण अंग बनेगी हाइड्रोजन ऊर्जा
बीपीसीएल अनुसंधान एवं विकास के निदेशक चंद्रशेखर नारायणमूर्ति ने हाइड्रोजन ऊर्जा प्रौद्योगिकी विषय पर चर्चा की। बताया कि बीपीसीएल ने भारत का पहला स्वदेशी इलेक्ट्रोलाइजर निर्मित किया है। आने वाले दिनों में हाइड्रोजन ऊर्जा जीवन का एक महत्वपूर्ण अंग साबित होगी।
आईआईटी कानपुर के आचार्य नितिन कायस्थ ने डिग्री ऑफ फ्रीडम नियम के महत्त्व पर चर्चा की। डॉ. हरीश कुमार वैज्ञानिक डीएमएसआरडीई ने अग्नि ईधन एवं पदार्थ विषय पर वक्तव्य दिया। यूओपी हनीवेल में कार्यरत निशेष गर्ग ने छात्रों से आगे बढ़ने की होड़ वाली जिंदगी के इतर शांत एवं सफल जीवन की तरफ ध्यान देने को कहा।
शिवनादर संस्थान से डॉ. यामिनी सुधा सिस्टला, इंडोरामा जगदीशपुर से विकास कुमार ने अपने नवाचार साझा किए। रासायनिक अभियांत्रिकी शिक्षा के भविष्य के अवसर और चुनौतियां विषय पर पैनल डिस्कशन में गुजरात उर्वरक लिमिटेड के पूर्व कार्यकारी निदेशक डीएम बुटाला, चंद्रशेखर नारायणमूर्ति, राजेंद्र सांख्ये, डॉ. नितिन कायस्थ ने छात्रों को नौकरी और शिक्षा में सामंजस्य के लिए पूर्व स्थापित नियमों को नए के साथ मिलाने के बजाय एकीकृत करने की सलाह दी।