अमेठी सिटी। रबी के सीजन में डीएपी की किल्लत के बीच किसानों के लिए राहत भरी खबर है। जिले को आसपास के जनपदों से 2550 एमटी डीएपी, एनपीके व टीएसपी मिली है, जो इफको केंद्रों, समितियों व प्राइवेट सेक्टर में बंटेगी।
वर्तमान में गेहूं के साथ अन्य फसलों की बोआई में डीएपी की मांग है। ऐसे में डीएपी की कमी के चलते केंद्रों व समितियों के बाहर किसानों की लंबी कतार लगी दिखाई पड़ रही थी। छोटे व बड़े सभी किसानों को केवल एक व दो बोरी ही डीएपी दी जा रही है। हालांकि विभाग का दावा है कि मांग के अनुरूप डीएपी व फास्फेटिक उर्वरकों की जिले में कमी नहीं है।
समितियों से पर्याप्त डीएपी नहीं मिल पाने के कारण किसान निजी दुकानों का सहारा ले रहे हैं। ऐसे में कृषि विभाग के अधिकारी प्रयास कर आसपास के जनपदों में आई रैक से 2550 एमटी डीएपी, एनपीके, टीएसपी जिले में लाने को कामयाब हुए हैं। बुधवार तक मिली डीएपी जिले में पहुंच जाएगी, जिसमें से 700 एमटी डीएपी, एनपीके इफको केंद्रों पर तो 300 एमटी डीएपी, एनपीके, टीएसपी साधन सहकारी समितियों को दी गई है। वहीं, 1550 एमटी डीएपी, एनपीके, टीएसपी प्राइवेट दुकानों पर उपलब्ध होगी।
कृषि उप निदेशक सत्येंद्र तिवारी ने बताया कि जिले में फास्फेटिक उर्वरक की कमी नहीं है। 2550 एमटी डीएपी मिली है, जो इफको केंद्रों, साधन सहकारी समितियों एवं प्राइवेट दुकानों पर उपलब्ध कराई गई है।
पारदर्शिता के साथ वितरित कराई जा रही खाद
जिला कृषि अधिकारी डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि शासन की ओर से निजी कंपनियों की डीएपी का 30 प्रतिशत हिस्सा समितियों के माध्यम से वितरित किया जाएगा। समितियों पर मांग के अनुसार डीएपी भेजी जा रही है। टोकन के आधार पर किसानों को पारदर्शिता के साथ खाद वितरित कराई जा रही है।