कमरौली (अमेठी)। क्षेत्र के माहेमऊ स्थित मदरसा दारुल उलूम कादरिया अशरफिया के प्रांगण में मंगलवार को मशहूर सूफी संत हजरत सैयद जलाल अशरफ का उर्स मनाया गया। कार्यक्रम का आगाज मजार पर कुलशरीफ व तिलावत-ए-कुरान से हुआ।
कुरान की आयत पढ़कर साहिबे उर्स को इसाले सवाब करते हुए सैयद मेराज अशरफ ने कौम व मिल्लत की तरक्की और खुशहाली की दुआ की। उर्स प्रबंधन कमेटी ने लंगर भी वितरित किया। इस दौरान जायरीन ने मजार पर चादरपोशी व गुलपोशी की। रात में जश्ने गौसुलवरा कांफ्रेंस में हजरत सैयद जलाल अशरफ की जिंदगी पर रोशनी डालते हुए कहा कि वह माहेमऊ की सरजमीं में विसाल हुए। वह एक सादगी पसंद सूफी संत थे। उन्होंने अधिकतर जिंदगी गरीबों के बीच गुजारी। उनकी इसी सादगी, इस्लाम की शिक्षा के यहां के लोग मुरीद हैं। उनकी याद में उर्स का आयोजन करते हैं।
बताया कि एक बार देश के मशहूर सूफी संत निजामुद्दीन औलिया इकराम के पास कोई कैंची लेकर आया तो उन्होंने उसे चलाने से रोक दिया और कहा कि हम सूफियों का काम काटना नहीं, जोड़ना है, इसलिए सूफी इकराम ने अपनी जिंदगी से समाज को जोड़ कर रखा, तोड़ा नहीं और हमेशा भाईचारा और आपसी मोहब्बत का संदेश दिया। वहीं जलसे में मौलाना सैयद जामी अशरफ किछौछवी ने खिताब करते हुए फरमाया कि कुरान की तिलावत करें, हक की बात कहें, दूसरों को कभी नुकसान नहीं पहुंचाएं और झूठ बोलने से तौबा करें।
तमाम शायरों ने भी शेर और नात-ए-मुस्तफा पेश किए। इस दौरान मौलाना जहांगीर अशरफ जायसी, मुफ्ती मंजूर अहमद, मुफ्ती अफजल हुसैन, मौलाना मोहम्मद आलम कादिरी, मौलाना तलत रसूल मिस्बाही, मौलाना मोहम्मद इसरार, कारी निजामुद्दीन, मौलाना शाकिर हुसैन, सब्तीन रजा अजीमाबादी, जिया गाजीपुरी, अताउल मुर्तजा, कौसरो तसनीम, तालिब रजा, सोहराब रजा, अताउर्रहमान, मौलाना अरशदुल कादिरी मौजूद रहे।