मुसाफिरखाना (अमेठी)। लखनऊ-वाराणसी हाईवे (एनएच 56) से जुड़े दो बाईपास के लिए जमीन अधिग्रहण के मुआवजे में 382 करोड़ रुपये के घोटाले के मामले में दर्ज मुकदमे की जांच कर रही पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। पुलिस ने घोटाले के समय तैनात अफसरों के कार्यकाल अवधि के साथ ही उन राजस्व कर्मियों की भी डिटेल मांगी है, जिनकी रिपोर्ट के बाद मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया संपन्न कराई गई। साथ ही अब तक मुआवजा घोटाले की कराई गई जांच रिपोर्ट भी पुलिस ने एसडीएम से मांगी है।
मुसाफिरखाना तहसील के रजिस्ट्रार कानूनगो सुरेंद्र प्रसाद श्रीवास्तव ने 12 अक्तूबर 2023 को थाने में तहरीर देकर 382 करोड़ रुपये की शासकीय क्षति के लिए तत्कालीन एसडीएम आरडी राम व अशोक कुमार कनौजिया के अतिरिक्त अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। चूंकि बड़ा मामला होने के कारण पहले इस मामले को जांच के लिए ईओडब्ल्यू को भेजने का निर्णय लिया गया। इसके लिए लिखा पढ़ी भी की गई है। हालांकि जब तक प्रकरण ईओडब्ल्यू को नहीं भेज दिया जाता है तब तक पुलिस को जांच करने को कहा गया।
ऐसे में मामले की जांच कर रहे विवेचना अधिकारी देवेंद्र चौहान ने बताया कि घोटाले के समय तैनात रहे अफसरों के कार्यकाल की अवधि के साथ ही उनका पूरा पता मांगा गया है। साथ ही मुआवजा वितरण की प्रक्रिया से जुड़े अन्य राजस्व कर्मियों के बारे में भी जानकारी मांगी गई है। अब तक हुई जांच की रिपाेर्ट, उस वक्त सर्किल रेट के निर्धारण की क्या प्रक्रिया थी, कैसे निर्धारण किया गया... इन सभी बिंदुओं पर रिपोर्ट एसडीएम से मांगी गई है। सीओ अतुल सिंह ने बताया कि जांच की निगरानी प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार सिंह के हवाले से की जा रही है। हरेक बिंदु का आकलन करते हुए पत्रावली का अध्ययन किया जा रहा है।
क्या था मामला
राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-56 के लखनऊ-सुलतानपुर मार्ग पर प्रथम जगदीशपुर बाईपास और द्वितीय मुसाफिरखाना बाईपास के चौड़ीकरण के लिए प्रस्तावित था। नियमानुसार, आच्छादित ग्रामों के संबंध में आपत्तियों का निस्तारण करते हुए इनका गजट कराया गया और इसमें निजी कृषि भूमिगांव सभा की सरकारी भूमि का अभिनिर्णय घोषित किया गया। तत्कालीन अफसरों ने पूर्व प्रचलित राष्ट्रीय राजमार्ग से दूरस्थ स्थित अधिग्रहीत भूमि के गाटों का प्रतिकर का निर्धारण कपटपूर्ण व नियम विरुद्ध रूप से राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्थित भूमि की सर्किल दर के आधार पर कर दिया। इससे सरकार को 382 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
डीएम की जांच में हुआ था खुलासा
एनएच-56 के चौड़ीकरण के लिए केंद्र सरकार की स्वीकृति मिलने के बाद वर्ष 2014 में एनएचएआई (नेशनल हाईवे ऑथारिटी) की मांग पर राजस्व विभाग ने जगदीशपुर और मुसाफिरखाना में कस्बे से बाहर की भूमि अधिग्रहीत कर गलत तरीके से कृषि योग्य भूमि का मुआवजा सर्किल रेट का चार गुना निर्धारित करने के बजाय हाईवे से सटी जमीन (इसका सर्किल रेट कई गुना अधिक) के बराबर निर्धारित कर दिया। डीएम राकेश कुमार मिश्र ने तत्कालीन एडीएम न्यायिक राजकुमार दुबे से जांच कराई तो मुआवजा वितरण में घोटाला सामने आया।