शाहगढ़ (अमेठी)। भागवत कथा विचार, वैराग्य, ज्ञान और हरि से मिलने का मार्ग बता देती है। समाज के बनाए गए नियम गलत हो सकते हैं किंतु भगवान के नियम न तो गलत हो सकते हैं और न ही बदले जा सकते हैं। ये बातें स्थानीय विकास खंड के पूरे दुर्गादीन तिवारी मजरे बहोरिकपुर गांव में राममिलन तिवारी के आवास पर श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन शुक्रवार को प्रवाचक डॉ. विनय व्यास ने कहीं।
प्रवाचक ने कहा कि किसी व्यक्ति को यह पता चले कि उसकी मृत्यु सातवें दिन हो जाएगी तो वह क्या करेगा, क्या सोचेगा। राजा परीक्षित ने यह जानकर उसी क्षण अपना महल छोड़ दिया। मृत्यु तो निश्चित है पर कब होगी, ये किसी को भी नहीं पता। प्रवाचक ने कहा कि मानव जीवन का मोल पहचानें और इसको प्रभु के चरणों में सौंप दें। अच्छे कर्म करो। इससे निश्चित ही कल्याण होगा।
प्रवाचक ने कहा कि भगवान मानव को जन्म देने से पहले कहते हैं कि ऐसा कर्म करना, जिससे दोबारा जन्म न लेना पड़े। मानव मुट्ठी बंद करके यह संकल्प दोहराते हुए इस पृथ्वी पर जन्म लेता है। प्रभु भागवत कथा के माध्यम से मानव का यह संकल्प याद दिलाते रहते हैं। भागवत कथा सुनने वालों का भगवान हमेशा कल्याण करते हैं। भागवत में कहा गया है कि जो भगवान को प्रिय हो, वही करो, हमेशा भगवान से मिलने का उद्देश्य बना लो। जो प्रभु का मार्ग हो उसे अपना लो, इस संसार में जन्म-मरण से मुक्ति भगवान की कथा ही दिला सकती है। इस मौके पर पूर्व एमएलसी दीपक सिंह, मानस, राजकिशोर तिवारी, राज करन, गायत्री प्रसाद, नंद कुमार शुक्ला आदि मौजूद रहे।