लीसंग्रामपुर (अमेठी)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र संग्रामपुर पर पिछले कई साल से प्रसूताओं को पौष्टिक आहार नहीं मिल रहा है। भर्ती होने वाली प्रसूताओं को भूखे पेट दर्द से कराहना करना पड़ रहा है। जननी सुरक्षा योजना के तहत सीएचसी पर प्रसव के बाद प्रसूताओं को मिलने वाला नाश्ता, दोपहर का भोजन व रात के खाने की व्यवस्था ठप पड़ी है जिससे सीएचसी के चूल्हे ठंडे पड़ गए हैं।
संग्रामपुर सीएचसी पर प्रसव विभाग में संविदा नर्स और एएनएम के हवाले प्रसव सेवाएं संचालित हो रही हैं। महिला डॉक्टर और सर्जन के न होने से ऑपरेशन की नौबत आने पर प्रसूताओं को जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया जाता है। हालांकि सीएचसी पर प्रतिदिन करीब तीन से पांच प्रसूताओं का सामान्य प्रसव यहां एएनएम व नर्स के द्वारा कराया जाता है। वहीं सुरक्षित मातृत्व के लिए जरूरी प्रसूताओं के पौष्टिक आहार पर एक साल से अधिक समय से डाका डाला जा रहा है। एक साल से अधिक समय से सीएचसी पर प्रसूताओं को न तो नाश्ता दिया जा रहा न ही भोजन। यह हाल तब है जब कुछ महीने अस्पताल के औचक निरीक्षण पर आईं सीडीओ डॉ. अंकुर लाठर के सामने इसका खुलासा भी हो चुका है।
निरीक्षण के दौरान सीडीओ से प्रसूताओं ने भोजन व नाश्ता न मिलने की जानकारी दी थी। जिस पर उन्होंने संबंधित को कड़ी फटकार लगाते हुए जल्द ही नाश्ता, भोजन प्रसूताओं को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। उसके बाद भी प्रसूताओं को भोजन नाश्ता उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुचारु नहीं हो पाई। अभी भी इस बात का कोई भरोसा नहीं है कि भोजन और नाश्ता मिलेगा या नहीं। शुक्रवार को सीएचसी में प्रसव के बाद अस्पताल में भर्ती प्रसूताओं ने बताया कि भोजन और दूध आदि कुछ भी नहीं मिला है। परिजन घर से दूध भोजन ला रहे हैं।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
संग्रामपुर सीएचसी के प्रभारी अधीक्षक डॉ. सौरभ सिंह ने बताया कि उन्नाव की एक संस्था कृष्णा इंटरप्राइजेज को इसकी जिम्मेदारी जिले में सौंपी गई थी। उसके किसी भी कर्मचारी ने मुझसे संपर्क तक नहीं किया। और न ही भोजन नाश्ता ही प्रसूताओं को दे रहे है। जिले के उच्च अधिकारियों को इसकी सूचना दे दी गई है।
सूची के आधार पर पौष्टिक आहार का निर्धारण
नाश्ता- सुबह करीब साढ़े आठ बजे तक एक ग्लास में 200 ग्राम दूध, दो अंडा, दलिया अथवा पोहा, चार ब्रेड व 10 ग्राम मक्खन।
दोपहर का भोजन- दोपहर एक बजे तक चार रोटी, दाल, मौसमी हरी सब्जी व सलाद व दही।
रात का भोजन- शाम सात बजे तक चार रोटी, मौसमी सब्जी, चावल व मौसमी फल।
प्रसूताओं व उनके परिजनों के बोल
मनिकापुर निवासी श्यामा देवी ने बताया कि अस्पताल से चाय नाश्ता कुछ भी नहीं मिल रहा है। परिजन घर जाकर नाश्ता व भोजन ला रहे हैं। अस्पताल वाले कह रहे कि यहां कुछ नहीं मिलता। अल्हाई बाजार सें आईं एक और श्यामा ने बताया कि वे प्रसूता बबिता की देखरेख में आई हैं। बताया कि यहां किसी भी प्रसूता को अस्पताल की तरफ से कुछ नहीं दिया जा रहा है। पूछने पर भी कोई इस बारे में कुछ नहीं बताता है। जरौटा निवासी चंद्रकांता ने बताया कि सीएचसी में किसी भी प्रसूता को नाश्ता, पौष्टिक आहार, व भोजन नहीं दिया जा रहा। प्रसूता के परिजन घर जाकर हम लोगों के लिए नाश्ता व भोजन ला रहे हैं। अगर सरकार ने प्रसूताओं को नाश्ता भोजन देने को कहा है तो अस्पताल के कर्मचारी को प्रसूताओं को भोजन नाश्ता उपलब्ध कराना चाहिए। आखिर हम लोगों के पौष्टिक आहार और भोजन पर आखिर कौन डाका डाल रहा है।