अमेठी। भक्ति प्रेम लक्षणा होती है। बिना प्रेम के भक्ति नहीं होती है। ये बातें श्रीमत स्वामी परमहंस आश्रम परिसर में चल रही नारद भक्ति सूत्र व नवधा भक्ति विवेचन कथा में कथावाचक ने कही। कथा वाचक अयोध्या कौशलेश सदन पीठाधीश्वर जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य विद्या भाष्कर महराज ने बताया कि भक्ति प्रेम लक्षणा होती है। बिना प्रेम के भक्ति नहीं होती है। प्रेमी भक्तहर पल अपने प्रिय से मिलन को आतुर रहता है।
उन्होंने कहा कि प्रेम कहने के लिए भी होंठ और अधर को मिलाकर अलग करना होगा। बताया कि प्रेम निष्कपट होना चाहिए। इस मौके पर स्वामी हरि चैतन्य ब्रम्हचारी महराज, स्वामी हर्ष चैतन्य महराज, हरिनारायणाचार्य, जय प्रकाश शास्त्री, जगदंबा प्रसाद मनीषी, यज्ञ नारायण उपाध्याय, संतोष शास्त्री, विष्णु स्वरूप मिश्र, सतीश मिश्र, संजय सिंह, बृजेंद्र सिंह, महेंद्र शुक्ल, भाष्कर तिवारी व काशी प्रसाद तिवारी आदि मौजूद रहे।