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खांसने और छींकने से भी फैलता है निमोनिया

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अमेठी। विश्व में पांच वर्ष तक के बच्चों की मृत्यु का एक बड़ा कारण निमोनिया है। निमोनिया तीव्र श्वसन संक्रमण होता है। आमतौर पर फेफड़ों में मौजूद एक छोटी थैली अल्वियोली में सांस लेने के दौरान हवा भर जाती है।
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निमोनिया के चलते कई बार इस थैली में मवाद और द्रव भर जाने से सांस लेने में मुश्किल पैदा हो जाती है। यह बीमारी स्ट्रेप्टोकोकस निमोनिया नामक वायरस के कारण होती है।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. सीएस अग्रवाल ने बताया कि निमोनिया एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में खांसने और छींकने से फैलती है। यूं तो निमोनिया किसी भी आयु वर्ग को हो सकता है लेकिन यह बैक्टीरिया पांच साल से छोटे बच्चों, खासकर दो साल से छोटे बच्चों, कम प्रतिरोधक क्षमता वाले बच्चों एवं बुजुर्गों को अपनी चपेट में ज्यादा लेता है।
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बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता बेहतर रहे, इसीलिए विटामिन ए की खुराक साल में दो बार दी जाती है। कोरोना काल में निमोनिया को लेकर खासतौर पर सतर्क रहने की जरूरत है। कहा कि कंजूगेट वैक्सीन (पीसीवी) को इसी वर्ष नियमित टीकाकरण में शामिल किया गया है।
जनपद में अगस्त माह से पीसीवी टीकाकरण अभियान शुरू हुआ। स्वास्थ्य विभाग की ओर से नौ माह तक के बच्चों का पीसीवी टीकाकरण किया जाता है। यह टीका न केवल निमोनिया से बच्चों की रक्षा करता है बल्कि सेप्सिस (खून का इंफेक्शन) और दिमागी बुखार से भी बचाव करता है।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी के मुताबिक बच्चों को पीसीवी की तीन खुराक दी जाती हैं। पहली खुराक डेढ़ माह, दूसरी खुराक साढ़े तीन माह की आयु होने पर और तीसरी खुराक नौ माह पर दी जाती है जो बूस्टर का काम करती है। पहले यह टीका प्रदेश के सिर्फ 19 जिलों में दिया जा रहा था।
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