अमेठी सिटी। मौसम परिवर्तन के बीच होली पर लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी होगी। चिकित्सकों ने लोगों को गीले रंगों के बजाए सूखे रंग से होली खेलने की सलाह दी है। जिला अस्पताल में कार्यरत फिजीशियन डॉ. अमित यादव ने केमिकल युक्त रंग के बजाए हर्बल व सूखे रंगों से होली खेलने की सलाह दी है।
केमिकल युक्त रंग से बदरंग हो सकती है होली
जगदीशपुर (अमेठी)। होली पर बाजार में हर्बल और ऑर्गेनिक रंगों के नाम पर रसायन युक्त खतरनाक रंग बेचा जा रहा है। यह रंग त्वचा के साथ आंखों और श्वसन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है।
केमिकल युक्त रंगों पर ही हर्बल रंगों का लेवल चिपकाकर बाजार बेचा जा रहा है। इनकी पैकिंग बेहद आकर्षक होती है। समझदारी होगी कि ब्रांडेड कंपनियों के ही रंग-गुलाल खरीदे जाएं।
खतरनाक रसायनों का करते हैं प्रयोग
- गौरीगंज सीएचसी अधीक्षक डॉ. राजीव सौरभ ने बताया कि लाल रंग को बनाने में मरकरी सल्फाइड का इस्तेमाल होता है तो हरा रंग कॉपर सल्फेट से बनाया जाता है। काला रंग लेड आक्साइड से बनाया जाता है। बैगनी रंग के लिए क्रोमियम आयोडाइड का इस्तेमाल होता है। दमा रोगियों के लिए यह रसायन खतरनाक है। त्वचा को भी नुकसान पहुंचाते हैं। संयुक्त जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. बद्री प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि आंख में रंग पड़ने पर तत्काल साफ पानी से धुलने के साथ चिकित्सक से संपर्क करें। सीएमओ डॉ. अंशुमान सिंह ने होली त्योहार को देखते हुए तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। सभी सीएचसी सेंटरों पर एक वार्ड आरक्षित कर दिया गया है।
घर पर बनाएं हर्बल रंग
हल्दी और लाल चंदन के प्रयोग से भी होली खेली जा सकती है। टेसू के फूलों को भिगोकर सुगंध युक्त रंग तैयार हो सकता है। गेंदे के फूलों को उबालकर रात भर पानी में रखें। पीला रंग तैयार होगा। मेहंदी की पत्तियों को उबले पानी में छोड़ने से मेहंदी रंग तैयार हो जाएगा। चुकंदर के जरिए गाढ़ा लाल रंग तैयार किया जा सकता है।