पितृपक्ष में अमेठी में पितरों को तर्पण करता श्रद्धालु।
- फोटो : पितृपक्ष में अमेठी में पितरों को तर्पण करता श्रद्धालु।
अमेठी। पितृपक्ष की एकादशी पर बुधवार को श्रद्धालुओं ने घाटों और घरों पर श्राद्ध व तर्पण किया। सुबह से ही पंडितों के निर्देशन में लोग विधि-विधान से पूजा-पाठ करते दिखे। पितृपक्ष में घर पर तर्पण और दान-पुण्य करना सबसे उत्तम माना गया है। इस दौरान ब्राह्मणों को भोजन कराना और गाय, कौवे व चींटियों को अन्न देना पितरों की तृप्ति का प्रमुख साधन है। आचार्य अंकित महाराज ने बताया कि श्राद्ध से पूर्वज प्रसन्न होकर परिवार पर कृपा बनाए रखते हैं और समाज में सहयोग व आपसी सद्भाव की भावना मजबूत होती है। तर्पण कर रहे रमेश चंद्र तिवारी ने कहा कि पूर्वजों के आशीर्वाद से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और यह परंपरा आत्मिक संतोष देती है। राकेश सिंह ने बताया कि श्राद्ध से पितर प्रसन्न होकर परिवार को खुशहाली का आशीर्वाद देते हैं। वहीं शैलेंद्र मिश्र ने कहा कि तर्पण और दान हमारी संस्कृति की अनमोल धरोहर है। इससे नई पीढ़ी को संस्कार और जीवन की सही दिशा मिलती है। आचार्य ने बताया कि बुधवार को पूरे दिन एकादशी तिथि रहने से उसी का श्राद्ध संपन्न हुआ। श्रद्धालु राजेश मिश्र ने कहा कि यह कर्म पितरों के प्रति श्रद्धा और आभार प्रकट करने का अवसर है।