गौरीगंज रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में चढ़ते श्रद्धालु।
अमेठी सिटी। प्रयागराज महाकुंभ में चौथे प्रमुख पर्व पूर्णिमा पर गंगा स्नान व दर्शन की दिल में आस लिए बुधवार सुबह-सुबह आस्था व उत्साह से लबरेज बुजुर्ग, महिलाएं, युवा व बच्चे रेलवे स्टेशन की तरफ चल पड़े। यहां दो घंटे की प्रतीक्षा के बाद जब ट्रेन पहुंची तो सुरक्षा की चिंता किए बिना हर कोई ट्रेन में घुसने के लिए आतुर दिखा। सीट पाने की ललक में एक-दूसरे के साथ धक्का-मुक्की करने लगे।
माघ पूर्णिमा के अवसर पर महाकुंभ में स्नान के लिए जाने को लेकर बुधवार को गौरीगंज रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर लोगों का सैलाब उमड़ा। प्लेटफार्म पर हर तरफ दर्शनार्थी ही नजर आ रहे थे। गंगा मैया के भक्ति गीत व जयकारों के बीच दो घंटे प्लेटफार्म पर ट्रेन की प्रतीक्षा की। 10:53 बजे लखनऊ-प्रयागराज पैसेंजर प्लेटफार्म संख्या एक पर पहुंची तो उसमें धक्का-मुक्की करते हुए श्रद्धालु सवार हुए। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए ट्रेन को करीब सात मिनट अतिरिक्त समय तक रोकना पड़ा।
नहीं मिली बस
सड़क पर जाम की जानकारी व परिवहन निगम की बस नहीं मिली तो हर कोई ट्रेन से यात्रा करने की जुगत में लगा रहा। कुछ लोग अन्य ट्रेन से प्रतापगढ़ पहुंच वहां से रवाना हुए। अधिकांश लोग रिंग मेला स्पेशल और लखनऊ-प्रयागराज संगम से ही गए।
144 साल बाद आया है संयोग
लोगों के अनुसार इस बार का महाकुंभ बेहद खास है। 144 साल बाद दुर्लभ संयोग बन रहे हैं। इसलिए कुभ भी करके वे संगम में डुबकी लगाने को आतुर दिखे। बुधवार को गौरीगंज रेलवे स्टेशन पर गौरीपुर गांव निवासी रमपता देवी अपने साथ मौजूद महिलाओं से बात कर रही थी। कह रही थीं कि हम तो अपने नातिनों का साथै ले जात अही, अब यह जीवन में अस संजोग न आए। बुजुर्ग राधिका कह रहीं थी कि सुने अही की बहुत पैदल चलै का पड़ी, लेकिन कुछ होए गंगा माई बोलाए अहां तौ जाब जरूर। बुजुर्ग केवला मौर्या ने कहा कि भैय्या गंगा माई कै किरपा अहै, बुलावा आवा है। जाएंगे जरूर चाहै जो हो। यही हाल तकरीबन अन्य श्रद्धालुओं का रहा।
सुरक्षा के बीच हो रहा ट्रेनों का परिचालन
गौरीगंज रेलवे स्टेशन अधीक्षक प्रवीण सिंह ने बताया कि भीड़ होेने से ट्रेनों के आगमन पर लोगों को चढ़ने में परेशानी हो रही है। आरपीएफ व जीआरपी संग स्टेशन कर्मी ट्रेन के आगमन के बाद पूरी तरह से निगरानी कर रहे है। लोगों के ट्रेन में सवार होने के बाद ही सुरक्षा व संरक्षा नियमों के बीच ट्रेनों को प्रस्थान करने का सिग्नल दिया जाता है। ऐसे में सुरक्षा के कारण अतिरिक्त समय तक ट्रेनों का ठहराव करना पड़ रहा है।