पितृपक्ष में पितरों का अमेठी में तर्पण करते लोग। स्रोत : स्थानीय
अमेठी। पितृपक्ष की रविवार से शुरुआत हो गई। पहले दिन श्रद्धालुओं ने दिवंगत पूर्वजों का स्मरण कर उनकी शांति के लिए घरों और मालती नदी घाट पर विधि-विधान से तर्पण और पिंडदान किया। सुबह से घाट पर लोगों की आवाजाही बनी रही। लोगों ने पूर्वजों को जल अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
पंडित आचार्य त्रिवेणी प्रसाद ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार पितृपक्ष में पितरों का आगमन दक्षिण दिशा से होता है। श्रद्धा के साथ पूर्वजों का स्मरण करना ही श्राद्ध माना गया है। उन्होंने बताया कि पितृपक्ष में प्रत्येक दिन तर्पण का विशेष महत्व है। इस बार पितृपक्ष 10 अक्तूबर तक चलेगा। इस दौरान लोग पूर्वजों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और पूजा करेंगे। कई स्थानों पर ब्राह्मण भोज भी कराया जाएगा।
पितृपक्ष के पहले दिन कई स्थानों पर पुरोहितों ने खोवा और अन्य सामग्री से पिंड तैयार कराए। मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं ने पिंडदान कर जल अर्पित किया। श्राद्ध कर्म के बाद चावल, कढ़ी और अन्य व्यंजनों का ग्रास पूर्वजों के निमित्त बाहर निकाला गया। इसके बाद पुरोहितों को भोजन कराया गया और धन, वस्त्र सहित अन्य सामग्री का दान किया गया।
राम बहादुर ने बताया कि पितृपक्ष में दिवंगत पूर्वजों का स्मरण कर तर्पण करने की परंपरा है। उन्होंने श्रद्धा के साथ जल अर्पित कर पूर्वजों की शांति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। शिव कुमार ने बताया कि पूर्वजों का तर्पण करने से मन को संतोष मिलता है। उन्हें याद करना और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करना परिवार की परंपरा का हिस्सा है। राम मनोरथ ने बताया कि पूर्वजों के निमित्त तर्पण और पिंडदान कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।