अमेठी। मंगलवार दोपहर समय एक बजे... रणवीर नगर की कंचन अपने बेटे अखिलेश को ई-रिक्शा से लेकर मुंशीगंज स्थित संजय गांधी अस्पताल के गेट पर पहुंची। बव्वे के पैर पर प्लास्टर चढ़ा था। गेट पर तैनात गार्ड ने बताया कि अस्पताल बंद है। इतना सुनते ही वह काफी परेशान हो उठी। अमेठी ब्लाॅक क्षेत्र निवासी सोनम ने बताया कि उनका पुत्र युवराज निमोनिया से पीड़ित था। रविवार को उसे भर्ती कराया था। उपचार होने के बाद आज डिस्चार्ज कर दिया। अमेठी निवासी अंसार ने बताया कि उनका अपेंडिक्स का बड़ा ऑपरेशन हुआ था, प्रतिदिन घर से जाकर पट्टी कराते थे। मंगलवार को अस्पताल बंद होने के बाद उन्हें परेशानी उठानी पड़ी।
यह चंद मामले, मरीजों की परेशानी को बयां करने के लिए काफी है। दरअसल, मुसाफिरखाना के गांव पांडेय का पुरवा मजरे रामशाहपुर निवासी अनुज शुक्ल की पत्नी दिव्या शुक्ला की मौत के मामले में मुंशीगंज स्थित संजय गांधी अस्पताल का लाइसेंस निलंबित करने के साथ यहां की इमरजेंसी, ओपीडी सहित अन्य सेवाओं पर स्वास्थ्य विभाग ने रोक लगा दी है।
मरीजों को उठानी पड़ी परेशानी
मंगलवार को संजय गांधी अस्पताल में ओपीडी व इमरजेंसी एवं अन्य सेवाएं पूरी तरह बंद रहीं। अस्पताल परिसर में सन्नाटा छाया रहा। मेन गेट के साथ इमरजेंसी गेट पर नोटिस चस्पा कराई गई है। गार्ड आने वाले लोगों, मरीजों व तीमारदारों से जानकारी लेकर अस्पताल बंद होने की बात कह कर उन्हें वापस कर रहे थे। सामान्य दिनों में इस अस्पताल की ओपीडी 800 के आसपास रहती थी। इमरजेंसी एवं विभिन्न जांच आदि में कुल 18,00 के आसपास मरीज का पंजीकरण होने के साथ ही सुविधा मिलती थी। ऐसे में अस्पताल बंद होने से मरीज को परेशानी उठानी पड़ रही है।
सीएमओ ने माना कि जिला अस्पताल पर बढ़ा दबाव
सीओ मयंक द्विवेदी के साथ अमेठी, गौरीगंज, मुसाफिरखाना सर्किल के विभिन्न स्थानों की फोर्स के साथ ही पीएसी के जवान तैनात किए गए हैं। मंगलवार को नर्सिंग के छात्रों को अंदर जाने से मना करने पर बहस भी हुई। हालांकि, बाद में मामला शांत करा दिया गया। सीएमओ डॉ. अंशुमान सिंह का कहना है कि जिला अस्पताल पर दबाव बढ़ा है। यहां पर अतिरिक्त प्रबंध किए जा रहे हैं। मंगलवार को जिला अस्पताल में 1271 मरीज देखे गए।
अस्पताल में 17 हुए डिस्चार्ज
संजय गांधी अस्पताल में लाइसेंस निलंबित किए जाने के बाद कुल 20 मरीज भर्ती थे। जिन्हें उपचार कर डिस्चार्ज करने की बात कही थी। अस्पताल में भर्ती 20 मरीजों में से 17 मरीज का उपचार कर उन्हें डिस्चार्ज किया गया है। मंगलवार शाम तक सिर्फ अस्पताल में तीन मरीज शेष भर्ती रह गए थे। सीईओ ने बताया कि मरीज का उपचार कर उन्हें डिस्चार्ज किया जा रहा है।
डायलिसिस करने आए मरीज लौटे
संजय गांधी अस्पताल में डायलिसिस की व्यवस्था होने से मरीज को काफी सहूलियत मिल रही थी। अस्पताल में प्रतिदिन छह मरीजों की डायलिसिस प्रतिदिन होती थी। अस्पताल प्रबंधन की ओर से मानें तो 5 अक्टूबर तक की अपॉइंटमेंट मरीज ने ली है। सीईओ ने बताया कि मंगलवार को तीन मरीजों ने डायलिसिस के लिए अपॉइंटमेंट ली थी लेकिन, अस्पताल बंद होने से उन्हें वापस जाना पड़ा। दो मरीज आयुष्मान कार्ड के लिए भी आए थे जिन्हें लौटना पड़ा।
बिना जांच कैसे दें खून
संजय गांधी अस्पताल में 300 यूनिट की क्षमता वाले ब्लड बैंक पर कार्रवाई नहीं की गई है लेकिन, इसमें एक बड़ी मुश्किल आ गई है। बिना सैंपल की जांच किए ब्लड कैसे दिया जाय। लाइसेंस निलंबन के कारण जांच बंद है। इस समय 6 यूनिट ब्लड है। ब्लड बैंक से प्रतिदिन 8 से 10 यूनिट ब्लड अस्पताल व अन्य अस्पतालों में जाता है। अस्पताल की ओर से ब्लड बैंक की क्षमता 500 यूनिट से अधिक करने की कवायद की जा रही है। जिसमें सभी उपकरण आ गए हैं। इसे आधुनिक ब्लड बैंक के रूप में विकसित कर ब्लड के साथ ही प्लाज्मा आदि यही निकाल कर मरीज को उपलब्ध कराने की कवायद चल रही थी, जल्द ही इसका संचालन भी शुरू होना था। अब वह भी अधर में फंस गया है।
हो रही विवेचना
सीओ मयंक द्विवेदी ने बताया कि अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था आदि को लेकर एहतियातन पुलिस फोर्स लगाई गई है। मृतका के पति की ओर से दी तहरीर पर दर्ज एफआईआर के संबंध में उन्होंने बताया कि विवेचना की जा रही है। साक्ष्य संकलन आदि जुटाए जा रहे हैं। उसके आधार पर आगे विधिक कार्रवाई की जाएगी।