अमेठी। पितृ पक्ष के दूसरे दिन सोमवार को जिले में श्रद्धा और आस्था का माहौल रहा। सुबह से ही श्रद्धालु धार्मिक और तर्पण स्थलों पर पहुंचे। लोगों ने सूर्य को साक्षी मानकर तिल और जल अर्पित किया। इसके बाद विधि-विधान से श्राद्ध कर्म और पिंडदान कर अपने पूर्वजों का स्मरण किया।
पितृ पक्ष में परिवार के लोग पूर्वजों की मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध और तर्पण करते हैं। सोमवार को भी विभिन्न स्थानों पर लोगों ने अनुष्ठान में हिस्सा लेकर पितरों के निमित्त कर्मकांड किए। कई परिवारों में सदस्यों ने एक साथ पूजन में भाग लिया। आचार्य त्रिवेणी प्रसाद मिश्र ने बताया कि पितृ पक्ष के दौरान परिवार अपने पितरों की निर्धारित तिथि पर तर्पण और पिंडदान करता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रद्धापूर्वक किए गए इन कर्मों से पितरों की तृप्ति की कामना की जाती है।
पिंडदान करने पहुंचे शिव प्रसाद ने कहा कि पितृ पक्ष की परंपरा परिवार को पूर्वजों की स्मृतियों से जोड़ती है। जगदंबा शुक्ल ने बताया कि पितरों की तृप्ति के लिए परिवार की ओर से श्रद्धा के साथ तर्पण करना जरूरी माना जाता है। विद्या शंकर के मुताबिक पूर्वजों का स्मरण और तर्पण हमारी परंपरा का हिस्सा है। वहीं राम अभिलाष ने कहा कि पितृ पक्ष पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का अवसर देता है, इसलिए परिवार के सदस्य इसमें शामिल होते हैं।