गौरीगंज (अमेठी)। कोविड संक्रमण कॉल में गांव में रोजगार देने की योजना जिले में जिम्मेदारों की भेंट चढ़ रही है। मनरेगा में 1.68 लाख जॉबकार्ड धारकों में से 1.46 लाख के मांगने के बावजूद मात्र 10 हजार को ही सौ दिन का रोजगार मिला। जिले में 21,948 ऐसे जॉब कार्डधारक रहे जिन्होंने काम की मांग ही नहीं की।
केंद्र सरकार की ओर से ग्रामीण क्षेत्र के कमजोर वर्ग के लोगों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गांरटी कार्यक्रम (मनरेगा) चलाया जाता है। योजना के तहत सभी जॉब कार्डधारकों को मांग पर सौ दिन का रोजगार देने का प्रावधान है।
जिले में कुल जॉब कार्डधारक 1,68,649 हैं। इनमें से 1,46,701 ने कोरोना कॉल के समय रोजगार की मांग भी की। लेकिन मांग के अनुसार उन्हें रोजगार नहीं मिला।
जिले में मनरेगा योजना में 25,522 परिवार को अब तक एक से 14 दिन, 29,399 परिवार को 15 से 30 दिन, 8,887 परिवार को 31 से 40 दिन, 11,833 परिवार को 41 से 50 दिन, 9,534 परिवार को 51 से 60 दिन, 7,204 परिवार को 61 से 70 दिन, 5,922 परिवार को 71 से 80 दिन, 16,892 परिवार को 91 से 99 दिन तथा 10,092 परिवार को ही सौ दिन का रोजगार मिला सका है।
इतना ही नहीं 101 परिवार को 150 दिन का रोजगार मिला है। जिले में 21,948 जॉब कार्डधारक ऐसे रहे जिन्होंने न रोजगार मांगा न ही उन्हेें मिला। मनरेगा योजना में जॉब कार्डधारकों को रोजगार नहीं मिलने की जानकारी होने के बाद विकास महकमे में हड़कंप मचा है। वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले से सभी जॉब कार्डधारकों को सौ दिन का रोजगार देने की कवायद तेज हो गई है।
बीडीओ को जारी हुई नोटिस
सीडीओ डॉ. अंकुर लाठर ने मनरेगा के तहत मानव दिवस सृजन की समीक्षा की। समीक्षा के दौरान मामला प्रकाश में आने के बाद बीडीओ को नोटिस जारी की है। नोटिस में मानव दिवस सृजित कर शत प्रतिशत जॉब कार्डधारकों को सौ दिन का रोजगार देने का निर्देश दिया है। सीडीओ ने जॉब कार्डधारकों को रोजगार नहीं मिलने पर कार्रवाई की चेतावनी दी है।