बाजारशुकुल (अमेठी)। क्षेत्र में 33 हजार केवी की भूमिगत केबल बृहस्पतिवार की रात करीब 10 बजे फिर फुंक गई। इससे बाजारशुकुल और महोना उपकेंद्र ठप हो गए। रात दस बजे बंद हुई आपूर्ति शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे बहाल हुई। लगातार 14 घंटे बिजली नहीं रहने से लोगों को खासी परेशानी हुई। दोनों उपकेंद्रों से जुड़ी करीब एक लाख आबादी ने जागकर रात काटी। आए दिन फॉल्ट व अन्य कारणों से बिजली नहीं रहने से कारोबारी हों या किसान सब परेशान हैं।
पावर कॉर्पोरेशन ने कठौरा में करीब चार किलोमीटर तक 33 हजार केवी की भूमिगत केबल डाली है। नमी और सीपेज के कारण आए दिन यह केबल फुंक जाती है। बृहस्पतिवार की रात करीब 10 बजे भूमिगत केबल फिर दग गई। बाजारशुकुल और महोना दोनों उपकेंद्र ठप हो गए।
उपभोक्ताओं ने बिजली कटने की जानकारी के लिए उपकेंद्र पर फोन किया लेकिन अधिकतर लोगों का फोन ही नहीं उठा। जिनके फोन उठे, उन्हें भी सही जानकारी नहीं मिल सकी। उमस भरी गर्मी में लोगों ने किसी तरह जागकर रात काटी। शुक्रवार को निगम के कर्मचारियों ने घंटों की मशक्कत के बाद केबल दुरुस्त की। तब दोपहर 12 बजे बिजली आपूर्ति बहाल हुई।
आठ दिनों में हुई 76 घंटे की हुई कटौती
क्षेत्र में बिजली की बदहाल व्यवस्था का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछली 11 जुलाई से 19 जुलाई के बीच करीब 192 घंटों में 76 घंटे की बिजली कटौती हुई है। इस हिसाब से आठ दिनों में उपभोक्ताओं को महज 116 घंटे बिजली ही मिल सकी है। छोटे-छोटे फॉल्ट को भी इसमें जोड़ दें तो यह समय और भी कम हो जाएगा।
खान-पान के व्यवसाय पर पड़ा असर, फेंकना पड़े पनीर और मटर
डेयरी व्यवसाय से जुड़े रवि गुप्ता ने बताया कि आएदिन बिजली कटौती से व्यवसाय चरमरा गया है। फ्रीजर नहीं चलने से दुग्ध उत्पाद नहीं मंगा पा रहे हैं। पिछले दिनों बिजली नहीं रहने से 10 से 12 हजार रुपये का सामान खराब हो गया था।
पनीर व हरी मटर के विक्रेता गिरधारी लाल मौर्या का कहना है फ्रीजर में रखी 10 किलोग्राम मटर व 15 किलोग्राम पनीर खराब हो गया, उसे फेंकना पड़ा। बिजली कटौती से व्यवसाय में घाटा हो रहा है। बाजारशुकुल कस्बे में रेस्टोरेंट चलाने वाले रविंद्र मौर्य ने बताया कि दस दिनों से बिजली ने परेशान कर दिया है। पिछले कुछ दिनों में बहुत सारा कच्चा माल खराब हो गया। 50 हजार रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।
नलकूप के भरोसे से सूख रही धान की फसल
पिछले दिनों जिन किसानों ने नलकूप के भरोसे धान की रोपाई कर दी थी। उनकी रातों की नींद गायब हो गई है। मौसम ने पहले से धोखा दे रखा है। बिजली कटौती से नलकूप भी नहीं चल पा रहे हैं। ऐसे में रोपे गए धान की फसल सूख रही है। साथ ही धान की रोपाई का कार्य लगभग ठप है। धान की रोपाई पिछड़ रही है। धान की रोपाई नहीं होने से नर्सरी (बेहन) खराब हो रही है।
केबल फुंकने से उपकेंद्र हुआ ठप
अवर अभियंता अश्विनी कुमार यादव ने बताया कि 33 हजार केवी की भूमिगत केबल दगने से उपकेंद्र ठप हो गए थे। केबल की मरम्मत कर आपूर्ति बहाल कर दी गई है। नमी व सीपेज की वजह से भूमिगत लाइन की केबल आए दिन दग जाती है। नई भूमिगत केबल डाली गई है। ठेकेदार ने अभी तक कार्य पूरा नहीं किया है। ठेकेदार को कार्य पूरा करने के लिए 20 जुलाई की समय सीमा दी गई है। नई लाइन से कार्य शुरू होने के बाद केबल दगने की समस्या से निजात मिल जाएगी।