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पटाखा बनाते समय विस्फोट, युवक की मौत

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07 : गौरीगंज : घटना स्थल की जांच करते डीएम-एसपी। -संवाद - फोटो : AMETHI
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गौरीगंज (अमेठी)। स्थानीय थाने के पूरे मानसिंह हरखपुर वार्ड में शनिवार सुबह आबादी के बीच पटाखा निर्माण के दौरान विस्फोट हो गया। विस्फोट के बाद गंभीर रूप से झुलसे युवक को जिला अस्पताल पहुंचाया गया जहां से उसे ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया। रास्ते में युवक की मौत हो गई। विस्फोट की सूचना के बाद हड़कंप मच गया। डीएम व एसपी ने घटना स्थल का निरीक्षण कर कार्रवाई का निर्देश दिया है। मृतक के पिता को हिरासत में लेकर पुलिस ने छानबीन शुरू कर दी है।
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पूरे मानसिंह हरखपुर वार्ड निवासी वशीर के पास पटाखा निर्माण का लाइसेंस था। शनिवार को वशीर का पुत्र अनवर (30) लाइसेंस में दर्ज भवन के बजाए आबादी के बीच स्थित अपने मकान की छत पर पटाखा बनाने में जुटा था। इसी बीच सुबह 7:45 बजे अचानक पटाखों में विस्फोट हो गया। विस्फोट में अनवर गंभीर रूप से झुलस गया। आवाज सुनकर मौके पर पहुंचे परिजन व पड़ोसियों ने मामले की सूचना पुलिस को देते हुए अनवर को जिला अस्पताल पहुंचाया।
अस्पताल में मौजूद चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद हालत नाजुक देख उसे ट्रॉमा सेंटर लखनऊ रेफर कर दिया। परिजन अनवर को लेकर लखनऊ ले जा रहे थे कि रास्ते में उसकी मौत हो गई। विस्फोट की सूचना पर स्थानीय विधायक राकेश प्रताप सिंह, डीएम राकेश कुमार मिश्र, एसपी डॉ. इलामारन जी, एएसपी हरेंद्र कुमार, सीओ मयंक द्विवेदी व एसडीएम राकेश कुमार दलबल के साथ मौके पर पहुंच गए।
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मौके पर पहुंचे अफसरों ने मकान के साथ जारी लाइसेंस के निर्धारित स्थान का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कोई विस्फोटक सामग्री नहीं पाई गई। पटाखे बनाने का लाइसेंस बुजुर्ग पिता के नाम पर जारी था। जिसकी वैधता 31 मार्च 2023 तक है। पुलिस उन्हें हिरासत में लेते हुए मामले की जांच में जुटी है। पटाखा निर्माण के दौरान घायल अनवर के मौत की सूचना पर परिवार में कोहराम मचा गया। पत्नी सानिया व पुत्री आयशा, आफरीन व आलिया का रो-रोकर बुरा हाल है। अनवर परिवार का भरण-पोषण करने वाला इकलौता था।
जांच के लिए टीम गठित
पूरे मान सिंह हरखपुर में पटाखा बनाते समय हुए विस्फोट ने प्रशासन के दावों की पोल खोल दी। आबादी से दूर पटाखा बनाने का लाइसेंस जारी होने के बावजूद आबादी के बीच छत पर पटाखा बनाना अपने में बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। जिस कमरे को दिखाकर लाइसेंस प्राप्त किया गया था वह भी विस्फोटक अधिनियम के तहत लाइसेंस जारी करने के लिए पर्याप्त नहीं था।
आकस्मिक स्थिति से निपटने में काम आने वाले तीन फायर सिलिंडर व एक एक्सपायर सिलिंडर बोरे में बंद मिला। इसके अतिरिक्त अनुबंध पत्र की किसी भी शर्त का पालन नहीं होने पर डीएम ने एसडीएम व सीओ गौरीगंज को लाइसेंस जारी होने की प्रक्रिया से लेकर जांच रिपोर्ट लगाने के दौरान जांच की गई या नहीं की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
गौरीगंज तहसील में सिर्फ तीन लाइसेंस
पटाखा निर्माण के लिए गौरीगंज तहसील क्षेत्र में तीन लाइसेंस जारी हुए हैं। विभाग की ओर से जारी लाइसेंस में राजगढ़ में चांद बाबू व लतीफ तो पूरे मान सिंह हरखपुर में वशीर का नाम शामिल है। लाइसेंस जारी होने के बाद मानक व सुरक्षा प्रबंध की जांच नहीं होती तो लाइसेंस धारी भी आबादी के बीच निर्माण कार्य में जुट जाते हैं।
हुई होती जांच तो खुल जाती पोल
जिला प्रशासन की ओर से 28 सितंबर को सभी एसडीएम व सीओ को पत्र जारी कर लाइसेंस प्राप्त विस्फोटक सामग्री निर्माताओं की जांच करने का निर्देश दिया गया है। निर्देश के बाद कहीं भी जांच नहीं की गई। सीओ ने आदेश को सभी थाना प्रभारियों को अग्रसारित कर जांच करने को कहा। आदेश ठंडे बस्ते में डाल जिम्मेदार मौज करते रहे। शनिवार को हुए हादसे ने जिला प्रशासन के आदेशों पर जिम्मेदारों की सक्रियता से पर्दा उठा दिया। लोगों का मानना था कि यदि जांच हुई होती तो शायद घटना न होती।
निरस्त किया जाएगा लाइसेंस
वशीर को लाइसेंस जारी करने में किन शर्तों का उल्लंघन हुआ था। किस अफसर ने जांच की थी। जांच के दौरान क्या मानक पूरे मिले थे। इसके पहले कब-कब नियमित व औचक निर्माण स्थल का निरीक्षण हुआ है या नहीं। इन बिंदुओं पर जांच चल रही है। डीएम ने कहा कि रिपोर्ट मिलने के बाद लाइसेंस निरस्त किया जाएगा। बिना जांच रिपोर्ट लगाने वाले अफसरों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी हो चुकीं कई घटनाएं
पूरे मान सिंह हरखपुर में शनिवार को हुए विस्फोट ने कई घटनाओं की यादें ताजा कर दीं। जिले में पहले भी विस्फोट के कई मामले हो चुके हैं। नवंबर 2002 में अमेठी में हुए बारूदी विस्फोट में तीन लोगों की जान गई थी तो 2003 में जगदीशपुर के हारीमऊ में हुए बारूदी विस्फोट में पिता-पुत्र की मौत हुई थी। पांच नवंबर 2004 को गौरीगंज में कस्बा निवासी कल्ले के घर हुए बारूदी धमाके में पुत्र, पुत्री, पत्नी, दामाद सहित एक रिक्शा चालक की मौत हो गई थी।
29 अप्रैल 2005 को जामो थाना क्षेत्र के बरौलिया गांव में मो. इस्लाम की पटाखा बनाने की फैक्ट्री में विस्फोट से तीन की मौत हुई थी। अक्तूबर 2007 में अमेठी के रायपुर फुलवारी में हुए बारूदी विस्फोट में एक ही परिवार के पांच लोगों की जान चली गई थी। वहीं 2016 में गौतमपुर में हुए विस्फोट में मकान पूरी तरह से ढह गया था। एक युवक की मौत हो गई थी। तो 30 जुलाई 2022 को जामो के दक्खिनवारा गांव में विस्फोट हुआ था हालांकि इस घटना में किसी की जान नहीं गई थी।
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