तिलोई मेडिकल कॉलेज में लगे वार्मर बेड। स्रोत : विभाग
अमेठी सिटी। तिलोई मेडिकल कॉलेज में गंभीर नवजातों के उपचार की व्यवस्था सीमित संसाधनों के सहारे चल रही है। यहां एसएनसीयू (स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट) और बाल रोग सर्जन की सुविधा नहीं है। ऐसे में जन्मजात विकृति, सांस लेने में गंभीर परेशानी या ऑपरेशन की जरूरत वाले नवजातों को लखनऊ और एम्स रायबरेली रेफर करना पड़ता है। मरीजों की संख्या बढ़ने पर एक वार्मर पर दो नवजातों को रखने की नौबत भी आ जाती है।
कॉलेज में एनआईसीयू के नाम पर केवल चार वार्मर बेड उपलब्ध हैं। नवजातों के उपचार के लिए चार फोटोथेरेपी यूनिट और दो वेंटिलेटर हैं। इन वेंटिलेटरों का उपयोग नवजातों से लेकर वयस्क मरीजों तक के लिए किया जाता है। ऐसे में एक साथ गंभीर मरीज बढ़ने पर नवजातों के लिए वेंटिलेटर की उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका रहती है।
अस्पताल में समय से पहले जन्मे, कम वजन वाले और सांस लेने में दिक्कत वाले नवजात भर्ती किए जाते हैं। जन्मजात विकृति वाले बच्चों का भी उपचार किया जाता है, लेकिन गंभीर मामलों में उन्हें उच्च चिकित्सा केंद्र भेजना पड़ता है। इससे परिजनों को समय और दूरी दोनों की चुनौती का सामना करना पड़ता है।
ऑपरेशन की सुविधा नहीं
बाल रोग सर्जन नहीं होने से जन्मजात विकृति वाले नवजातों का स्थानीय स्तर पर ऑपरेशन संभव नहीं है। रीढ़ सहित अन्य जटिल विकृतियों वाले बच्चों को विशेषज्ञ उपचार के लिए बाहर रेफर किया जाता है।
भवन बनने के बाद बढ़ेंगी सुविधाएं
मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. रीना शर्मा ने बताया कि मुख्य अस्पताल भवन हैंडओवर होने के बाद बाल रोग विभाग की अलग यूनिट, बाल रोग सर्जन और अन्य जरूरी संसाधनों की मांग शासन को भेजी जाएगी। भवन पूरा होने के बाद सुविधाओं के विस्तार की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।