अमेठी। आई फ्लू का संक्रमण बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार को अकेले जिला अस्पताल में आई फ्लू से ग्रसित 98 मरीजों का उपचार किया गया। खास बात तो यह है कि जिला अस्पताल को यदि छोड़ दें तो 13 सामुदायिक व 30 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आंख का कोई डॉक्टर ही नहीं है। इन अस्पतालों पर आने वाले मरीजों को परेशानी हो रही है। जिला अस्पताल में कुल तीन नेत्र रोग विशेषज्ञ कार्यरत हैं। इसके अलावा अन्य किसी भी अस्पताल में नेत्र रोग विशेषज्ञ नहीं है। जब आई फ्लू का संक्रमण बढ़ा तो लोग अस्पताल पहुंचने लगे लेकिन, वहां पर विशेषज्ञ की तैनाती ही नहीं है। मरीजों को सामान्य चिकित्सक से इलाज कराकर लौटना पड़ रहा है।
खास बात तो यह है कि भले ही नेत्र रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है, लेकिन छह सीएचसी पर नेत्र परीक्षण अधिकारी जरूर नियुक्त हैं। इनका काम चिकित्सक की सलाह पर आंखों की नजर की जांच करनी होती है। फिलहाल, मरीजों को इससे मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। सीएमओ डॉ. अंशुमान सिंह का कहना है कि चिकित्सकों की कमी को लेकर अधिकारियों को जानकारी दे दी गई है। फिलहाल, मरीजों को कोई परेशानी न हो, इसका पूरा ख्याल रखा जा रहा है।
किसी की आंखें लाल तो कोई दर्द से परेशान
शुक्रवार को जिला अस्पताल में ओपीडी में नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. कुमुद सिंह की ओपीडी में मरीजों की भीड़ थी। किसी की आंख लाल थी तो किसी की दर्द हो रही थी। यहां पर 98 मरीजों का उपचार किया गया। सीएमएस डॉ. बीपी अग्रवाल का कहना था कि मरीजों को समस्या न हो, इसका ख्याल रखा जा रहा है।
बाजार से गायब हो रहीं आईड्राॅप
आई फ्लू का संक्रमण बढ़ने के साथ ही बाजार से आई ड्रॉप की शार्टेज हो गई है। कई ब्रांडेंड कंपनियों की आई ड्रॉप बाजार में नहीं मिल रही है। फिलहाल, अस्पतालों में पर्याप्त दवाओं की उपलब्धता का दावा अधिकारी कर रहे हैं।
क्या है बीमारी
आई फ्लू वायरल कंजक्टिवाइटिस है। बैक्टिरियल इन्फेक्शन होने से बच्चों से लेकर बड़े तक इसके चपेट में आ रहे हैं। इसमें सफेद झिल्ली यानी कंजेक्टावा में सूजन हो जाती है।
आंख में जलन और पानी आने लगता है। बैक्टीरिया का संक्रमण होने के बाद कीचड़ आने लगता है।
बीमारी हो तो यह करें
दिन में कम से कम दो बार नहाएं।
गर्म पानी ठंडा करके आंख की सफाई करें। सफाई से बैक्टीरिया का असर कम होगा।
आंख की एंटी बायोटिक ड्रॉप डालें।
रुमाल, तौकिया, तकिया को रोज धुले, रोज सुखाएं।
काले चश्मे जरूर पहने। जिससे आंख ढंकी रहे। मरीज भी इसे पहने।जिससे आंख को बार बार छुएंगे नहीं।